मां वैष्णो के दर पर भी कोरोना के बढ़ते प्रकोप के चलते सन्नाटा पसरने लगा है। कटड़ा की सड़कें सूनी और यात्रा ट्रैक वीरान पड़ा है। बमुश्किल एक हजार श्रद्धालु मां के दर पर पहुंच रहे हैं, जबकि कुछ सप्ताह पूर्व तक औसतन 14 से 15 हजार श्रद्धालु मां के धाम में शीश नवाने पहुंचते थे। होटल खाली पड़े हैं। श्रद्धालुओं की कमी के चलते साढ़े पांच हजार से अधिक घोड़े व पिट्ठू वाले घर लौट गए हैं। अब मात्र 200 से 250 ही बचे हुए हैं जिन्हें यात्रियों का इंतजार रहता है। होटल, रेस्टोरेंट, प्रसाद के कारोबारियों का रोजाना करोड़ों का नुकसान हो रहा है।
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वैष्णो देवी धाम
- फोटो : अमर उजाला
कटड़ा में लगभग 700 होटल व गेस्ट हाउस हैं। इन दिनों लगभग सभी खाली पड़े हैं। होटल व्यवसाय से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि यात्री बिल्कुल भी नहीं हैं। पिछले कुछ महीनों से थोड़ा बहुत कारोबार हो जाता था, लेकिन अब बिल्कुल सन्नाटा है। स्टाफ तक को घर से पैसे देने की नौबत आ गई है। रखरखाव पर आने वाला खर्च और बिजली बिल अलग से है। होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश वजीर का कहना है कि कोरोना ने होटल व्यवसायियों की कमर तोड़ दी है।
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मजदूर यूनियन के प्रधान भूपिंदर सिंह ने बताया कि 6000 घोड़ा-पिट्ठू वालों का परिवार मां वैष्णो देवी के श्रद्धालुओं पर निर्भर है। ट्रैक पर यात्री नहीं हैं। ऐसे में खुद का खर्च और मवेशी को खिलाने का खर्च भी उठा पाना मुश्किल हो रहा था। ज्यादातर रियासी, डोडा-भद्रवाह के घोड़ा-पिट्ठू वाले हैं जो अब घरों को लौट गए हैं। मात्र दो से ढाई सौ लोग ही रुके हुए हैं जिन्हें आस है कि यात्री आएंगे और उनका रोजी-रोजगार चल सकेगा। उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में सरकार को आगे आना चाहिए और इन्हें दस-दस हजार रुपये की आर्थिक सहायता मुहैया कराना चाहिए।
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वैष्णो देवी धाम
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प्रसाद बेचने वाले भी परेशान हैं। उनका कहना है कि ग्राहक नहीं हैं। ऐसे में उन्होंने जहां से मेवा मंगवाया है उसकी भरपाई करने में संकट उत्पन्न हो गया है। दिन रात केवल श्रद्धालुओं की आस रहती है कि कोई आए ताकि उनकी बोहनी हो सके। उनका कहना है कि ऐसे समय में दुकान भी बंद नहीं कर सकते क्योंकि माल के खराब होने का डर है। बंदी होने पर चूहों द्वारा नुकसान पहुंचाने की भी चिंता है।
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पिछले कुछ दिनों से यात्रा में लगातार गिरावट आ रही है। मंगलवार को देर शाम तक 581 श्रद्धालु मां के दर पर गए। सोमवार को 755 ने पंजीकरण कराया था। ऑनलाइन यात्रा पर्ची निकालने के बाद भी श्रद्धालु नहीं पहुंच रहे हैं। उन्होंने अपनी यात्रा टाल दी है। 21 अप्रैल को 5601 श्रद्धालु मां के दरबार में पहुंचे थे। हालांकि, ऑनलाइन पंजीकरण का आंकड़ा रोजाना 1200 से 1500 के बीच रह रहा है।