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Amarnath Yatra: नए ट्रैक पर घंटियां-जयघोष, पुराने यात्रा मार्ग पर रडार की बीप, तस्वीरों में देखें आस्था और जांबाजी की नजीर

Tue, 12 Jul 2022 06:31 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Tue, 12 Jul 2022 06:31 PM IST
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cloudburst near amarnath cave Amarnath Yatra jawans in search of missing people
बचाव अभियान, अमरनाथ यात्रा - फोटो : अमर उजाला

पवित्र गुफा के एक किलोमीटर के दायरे में आस्था और हौसले की नजीर पेश करते दो दृश्य साथ-साथ चल रहे हैं। अमरनाथ गुफा के पास भीषण हादसे के बावजूद जोश से भरे शिवभक्त घंटियों की गूंज और जयघोष के बीच बाबा बर्फानी के दर्शन से अभिभूत हो रहे हैं। श्रद्धालुओं की आवाजाही पहाड़ और बर्फ काटकर बनाए गए नए रास्ते से हो रही है। वहीं, कुछ ही दूरी पर गुफा के पुराने रास्ते पर जमी बर्फ के नीचे हिमवीर जान हथेली पर रखकर लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं। पुराने रास्ते पर ग्लेशियर है, जिसकी बर्फ काटकर रेस्क्यू दल नीचे बर्फीले पानी को खंगाल रहे हैं। यहां रडार की बीप से लोकेशन पता की जा रही है।

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बचाव अभियान, अमरनाथ यात्रा - फोटो : अमर उजाला

पुराने यात्रा मार्ग पर रेस्क्यू टीम के सदस्य रस्सियां बांध बर्फीले पानी में उतर रहे हैं। बर्फ के नीचे के हालात को रेको आर-9 रडार की बीप बयान कर रही है। आर्मी ट्रेनिंग कमांड (आरट्रैक) के हाई आल्टीट्यूड वारफेयर स्कूल की माउंटेन रेस्क्यू टीमें इस रेस्क्यू ऑपरेशन में सबसे जोखिम भरे टास्क को अंजाम दे रही हैं। मलबे से लेकर नाले को खंगाला जा चुका है। 


 
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बचाव अभियान - फोटो : अमर उजाला

लापता लोगों के अब बर्फ की परत के नीचे फंसे होने की आशंका है, लेकिन यहां बर्फ की बीस से तीस फीट मोटी परत है, जिसे भेदकर नीचे तक के रास्ते बनाए जा रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में हादसे की आशंका रहती है, लेकिन रस्सी डालकर जांबाज भूमिगत बर्फीले नाले का चप्पा-चप्पा खंगाल रहे हैं।

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बचाव अभियान - फोटो : अमर उजाला
रेस्क्यू दल की निगरानी कर रहे एक अधिकारी के अनुसार बर्फीले इलाके में कई ऐसी जगह हैं, जहां पहुंचना भी मुश्किल है। रेको रडार की मदद से माउंटेन रेस्क्यू टीमें बर्फ के नीचे का चप्पा-चप्पा खंगाल रही हैं। 
 
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बचाव अभियान - फोटो : अमर उजाला
ऐसे काम करता है रेको आर-9 रडार

मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों खासकर बर्फ में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने में रेको आर-9 रडार की मदद ली जाती है। माउंटेन रेस्क्यू टीमें इस सर्च सिस्टम से लैस हैं। बर्फ के नीचे जाने वाले रेस्क्यू दल के सदस्य के पास रिफ्लेक्टर होता होता है। बाहर रडार से बीम फेंकी जाती है। रिफ्लेक्टर पर बीम पड़ते ही रडार इसकी लोकेशन को ट्रैक करता है। बर्फ में यह रडार 30 मीटर तक की लोकेशन को ट्रैक करता है।

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