अमरनाथ गुफा के पास शुक्रवार शाम आए सैलाब के बाद से जारी रेस्क्यू ऑपरेशन का तीसरा दिन मायूसी में गुजरा। रेस्क्यू दलों ने मलबा, पानी, बर्फ से लेकर नालों को छान मारा, लेकिन कहीं कोई सुराग नहीं लगा। इतने लंबे समय तक बर्फीले पानी में या फिर मलबे में फंसे होने पर किसी के जिंदा बचने की संभावना कम होती जा रही है।
स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (एसडीआरएफ) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सेना ने अत्याधुनिक उपकरणों और भारी मशीनों को भी खोज अभियान में लगाया है। डॉग स्क्वायड जहां भी संकेत दे रहा है, वहां खोदाई की जा रही है। जैसे-जैसे वक्त बीत रहा है, लापता लोगों को लेकर चिंताएं भी बढ़ रही हैं। सैलाब में जिस तरह से मलबा आया है, उसमें फंसने वाले का इतने वक्त तक बचना बेहद मुश्किल है। कोई जीवित बचता है तो यह सिर्फ करिश्मा ही हो सकता है।
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Amarnath rescue operation
- फोटो : अमर उजाला
युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन के बीच ऐसे करिश्मे का इंतजार किया जा रहा है। अधिकारी ने कहा कि तीसरे दिन न तो कोई लापता का सुराग लगा है और ना ही कोई शव बरामद हुआ है। रेस्क्यू टीमें अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रही हैं। अधिकारी के अनुसार इस पूरे अभियान में खराब मौसम की अलग से चुनौती बनी हुई है।
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Amarnath rescue operation
- फोटो : अमर उजाला
मलबे की कई फीट मोटी परत हटाने से लेकर पत्थर और चट्टानें तोड़कर सर्च ऑपरेशन आगे बढ़ रहा है। नाले में बर्फीले पानी को भी खंगाला जा रहा है। कहीं पुल के नीचे बर्फ जमी है तो उसे भी कटर से तोड़कर चप्पा-चप्पा जांचा जा रहा है। ड्रोन से भी पूरे इलाके की निगरानी की जा रही है। जहां कहीं भी किसी के होने की संभावना नजर आ रही है, रेस्क्यू टीमें उसे पूरी तरह जांच रहे हैं ताकि किसी की जान या फिर कोई पार्थिव देह मिल जाए।
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Amarnath rescue operation
- फोटो : Amar Ujala
जिस रास्ते पर चलना भी मुश्किल है, वहां सेना के जवान तीन टन वजन की डोजर मशीन को रस्से से खींचकर पहुंचा रहे हैं। अमरनाथ यात्रा मार्ग का यह दृश्य रेस्क्यू ऑपरेशन में चल रही जद्दोजहद की बानगी भर है। सैलाब में लापता हुए लोगों की खोज के साथ क्षतिग्रस्त यात्रा मार्ग को बहाल करने के लिए भी बड़े स्तर पर अभियान चल रहा है। सूत्रों के अनुसार अस्सी फीसदी के करीब यात्रा ट्रैक बहाल कर दिया गया है।
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रविवार को भारतीय सेना की इंजीनियरिंग रेजीमेंट के 12 जांबाजों ने डोजर मशीन को कई किलोमीटर तक रस्सों से खींचकर मुश्किल रास्ते से आगे पहुंचाया।