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पाकिस्तान की नापाक हरकत के चलते डोली से पहले निकला पिता का जनाजा, बेटी की शादी स्थगित
Wed, 23 Oct 2019 12:17 PM IST
Pranjal Dixit
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
Published by: Pranjal Dixit
Updated Wed, 23 Oct 2019 12:17 PM IST
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उत्तरी कश्मीर के सीमावर्ती जिला कुपवाड़ा के तंगधार सेक्टर में पाकिस्तान द्वारा की गई गोलाबारी ने एक परिवार की खुशियां छीन ली। जिस घर से चंद दिन बाद डोली उठनी थी, उस घर से जनाजा निकला। बेटी की शादी से ऐन पहले गोलाबारी में पिता की मौत ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया। अब उस घर में कमाने वाला कोई और सदस्य नहीं है। परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा है।
श्रीनगर से करीब 180 किलोमीटर दूर कुपवाड़ा जिले के तंगधार सेक्टर के गुंडीशत गांव में चारों ओर मातम पसरा हुआ है। 19 अक्तूबर की रात को पाकिस्तान की ओर से गोलाबारी के चलते लोग दहशत में हैं। इलाके में दाखिल होने पर साफ तौर से तबाही का मंजर नजर आ रहा है। गोलाबारी में पूरी तरह तबाह हुए दो मकानों से मंगलवार को भी हल्का धुआं उठ रहा था। एक घर के बरामदे पर बैठी कुछ महिलाएं रोती नजर आईं। वह घर मोहम्मद सादिक जू (55) का था, जिसकी गोलाबारी में मौत हो गई।
पाकिस्तान की नापाक हरकत से गांव वालों और मोहम्मद सादिक के परिवार में काफी गुस्सा है। बेबस परिवार घटना के तीन दिन बाद भी एक कमरे में खामोश बैठकर मातम मना रहा था। अपने परिवार के सबसे बड़े सदस्य के जाने से उसकी पत्नी और सबसे बड़ी बेटी साइका पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा है। उनकी आंखें सूख नहीं रहीं हैं। साइका की अन्य तीन बहनें और एक भाई इतने मासूम हैं कि अभी वह यह नहीं समझ पा रहे कि आखिर हुआ क्या है जो गांव वालों का उनके घर पर आना-जाना लगा हुआ है।
पाकिस्तान की नापाक हरकत से गांव वालों और मोहम्मद सादिक के परिवार में काफी गुस्सा है। बेबस परिवार घटना के तीन दिन बाद भी एक कमरे में खामोश बैठकर मातम मना रहा था। अपने परिवार के सबसे बड़े सदस्य के जाने से उसकी पत्नी और सबसे बड़ी बेटी साइका पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा है। उनकी आंखें सूख नहीं रहीं हैं। साइका की अन्य तीन बहनें और एक भाई इतने मासूम हैं कि अभी वह यह नहीं समझ पा रहे कि आखिर हुआ क्या है जो गांव वालों का उनके घर पर आना-जाना लगा हुआ है।
सादिक की पत्नी ने कहा- ‘हम इधर अपने घर में सोये थे। जब इधर-उधर से गोले की आवाज आई तो हम सब नीचे चले गए। साइका के पापा आए और कहां मैं मकान के अंदर देखूंगा कौन है कौन नहीं। तभी उधर से गोला आया और सीधा मकान पर गिरा, जिससे उनकी मौत हो गई। बाद में मैंने जब लोगों से पूछा तो बताया गया कि कि शेलिंग से वह जख्मी हो गए हैं, उन्हें अस्पताल भेजा गया है।’
सादिक की पत्नी ने कहा कि उनकी चार बेटियां और एक बेटा है। अब उसके घर में कमाने वाला कोई नहीं है। तीन दिन बाद ही बेटी की शादी होने वाली थी। सारी तैयारी पूरी हो चुकी थी। लेकिन पाकिस्तान की गोलाबारी ने सब कुछ बर्बाद कर दिया। बेटी के सिर से पिता का साया उठ गया। उसने प्रशासन और सरकार से परिवार के लिए मदद की मांग की।
सादिक की पत्नी ने कहा कि उनकी चार बेटियां और एक बेटा है। अब उसके घर में कमाने वाला कोई नहीं है। तीन दिन बाद ही बेटी की शादी होने वाली थी। सारी तैयारी पूरी हो चुकी थी। लेकिन पाकिस्तान की गोलाबारी ने सब कुछ बर्बाद कर दिया। बेटी के सिर से पिता का साया उठ गया। उसने प्रशासन और सरकार से परिवार के लिए मदद की मांग की।
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28 को मेरी शादी थी, अब हमारा क्या होगा
जिस साइका के हाथों में मेहंदी लगने वाली थी, वह कमरे के एक कोने में गुमसुम बैठी थी। उसकी आँखों से आँसू छलक रहे थी। साइका से बात करने की कोशिश की तो उसने बस दबी-सी आवाज में सिर्फ इतना ही कहा- ‘28 तारीख को मेरी शादी थी। सभी तैयारी की हुई थी। अब पापा ही नहीं रहे। अब हमारा क्या होगा।’ घटना के बाद से लगातार सादिक के परिवार के प्रति संवेदना जताने लोग पहुंच रहे हैं।
जिस साइका के हाथों में मेहंदी लगने वाली थी, वह कमरे के एक कोने में गुमसुम बैठी थी। उसकी आँखों से आँसू छलक रहे थी। साइका से बात करने की कोशिश की तो उसने बस दबी-सी आवाज में सिर्फ इतना ही कहा- ‘28 तारीख को मेरी शादी थी। सभी तैयारी की हुई थी। अब पापा ही नहीं रहे। अब हमारा क्या होगा।’ घटना के बाद से लगातार सादिक के परिवार के प्रति संवेदना जताने लोग पहुंच रहे हैं।
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अगर बंकर होते तो सर छुपाने के लिए मिल पाती जगह
गुंडीशत गांव के परवेज अहमद ने बताया कि 19 अक्तूबर की रात को पाकिस्तान की ओर से भीषण गोलाबारी की गई। उस दिन से कोई भी रात भर नहीं सो पाया है। जिनके घरों का नुकसान हुआ है, उनके कुछ लोग पड़ोसियों के घरों में तो कुछ खुले आसाम तले रातें बिता रहे हैं। अगर बंकर होते तो ऐसी स्थिति में सिर छुपाने के लिए कोई जगह मिल जाती। सरकार से गुजारिश है कि इस इलाके में अंडरग्राउंड बंकर बनवाए जाएँ।
गुंडीशत गांव के परवेज अहमद ने बताया कि 19 अक्तूबर की रात को पाकिस्तान की ओर से भीषण गोलाबारी की गई। उस दिन से कोई भी रात भर नहीं सो पाया है। जिनके घरों का नुकसान हुआ है, उनके कुछ लोग पड़ोसियों के घरों में तो कुछ खुले आसाम तले रातें बिता रहे हैं। अगर बंकर होते तो ऐसी स्थिति में सिर छुपाने के लिए कोई जगह मिल जाती। सरकार से गुजारिश है कि इस इलाके में अंडरग्राउंड बंकर बनवाए जाएँ।