पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा पर स्थित करमाड़ा सेक्टर के गांव सेयाल निवासी मोहम्मद रफीक के परिवार को शुक्रवार को देर रात का खाना भी नसीब नहीं हो सका था। पाकिस्तानी सेना की तरफ से नियंत्रण रेखा पर शुरू की गोलाबारी में पहला गोला रफीक के घर आ गिरा, जहां उसकी बीवी रफिया खाना पका रही थी। कुछ दूरी पर रफीक और उसका पुत्र इरफान खाना पकने का इंतजार कर रहे थे। पाकिस्तानी गोले से उनके शरीर के चिथड़े उड़ गए।
चूल्हे के पास पड़ी लाशें देख सिहर उठा पुंछ, अधपकी रोटी और शरीर के चिथड़े बयां कर रहे थे पाक की कायरता
रफीक के दो अन्य बेटे और एक बेटी मकान के अंदर थे, जो बाल-बाल बच गए। लेकिन पाकिस्तानी गोलाबारी के चलते न तो बच्चे घर से बाहर निकलकर अपने मां-बाप और भाई तक पहुंच पाए और न ही आस पड़ोस का कोई व्यक्ति ही उन तक पहुंच पाया। उन तीनों की मौके पर ही मौत हो गई।
देर रात गोलाबारी थमने के बाद जब कुछ लोग घटनास्थल पर पहुंचे तो घर का मंजर देख लोग चीख पड़े। वहां पर बिखरे शवों के साथ ही कई टुकड़ों में बंट चुका चूल्हा, तवा और टूटे चूल्हे के बीच पड़ी दो टुकड़ों में बंटी अधपकी रोटी पाकिस्तानी सेना की बर्बरता को बयां कर रही थी।
पाकिस्तानी गोलाबारी के कुछ कम होने पर सबसे पहले रफीक के घर पहुंचे उसके चचेरे भाई मोहम्मद सादिक ने कहा कि पाकिस्तानी गोलाबारी ने दस साल पहले भी इस घर पर कहर बरपाया था, तब रफीक की पहली पत्नी इसी जगह पाकिस्तानी गोला लगने से मारी गई थी। उसके पीछे छोटे-छोटे बच्चे रह गए थे। इसके बाद रफीक ने रफिया से शादी की और गम भुलाकर आगे बढ़ने लगा था।
सादिक ने कहा कि शुक्रवार रात को पाकिस्तान ने भाई का पूरा परिवार ही खत्म कर दिया। जब हम यहां पहुंचे तो टूटे चूल्हे के पास मेरी भाभी का शव पड़ा था और कुछ दूरी पर मेरे भाई और भतीजे का शव था। पाकिस्तानी सेना ने उन्हें खाना तक नहीं नसीब होने दिया।
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