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कहानी राम मंदिर आंदोलन के 10 दिग्गजों की, इनकी छिनी कुर्सी तो किसी ने गंवाई थी जान
Sat, 09 Nov 2019 03:19 PM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Sat, 09 Nov 2019 03:19 PM IST
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देश के सर्वोच्च न्यायालय ने आज एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने 40 दिनों की सुनवाई के बाद यह फैसला दिया। पीठ ने विवादित जमीन पर रामलला के हक में निर्णय सुनाया। आईए आपको बताते हैं अयोध्या आंदोलन के उन 10 बड़े चहरों के बारे में जिन्होंने इस आंदोलन को हवा दी। इस आंदोलन को बड़े स्तर पर लेकर जाने वाले भाजपा के भीष्म पितामह लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, कल्याण सिंह, विनय कटियार, कोठारी बंधु और राम विलास वेदांती सहित देश के कई बड़े नेता शामिल थे।
लालकृष्ण आडवाणी
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
लालकृष्ण आडवाणी सबसे बड़ा चेहरा
राम मंदिर के पक्ष देश में माहौल बनाने के लिए आडवाणी ने 1990 में सोमनाथ से अयोध्या के लिए रथ यात्रा निकाली थी। इसी यात्रा से अयोध्या आंदोलन को धार मिली थी। देश के कई शहरों और गांवों से लोग अयोध्या में कारसेवा करने के लिए पहुंच रहे थे। अयोध्या समेत देश के कई हिस्सों में 'राम लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे' का नारा गूंज रहा था। आडवाणी अयोध्या आंदोलन से भाजपा के सबसे बड़े हिंदुत्व का चेहरा बन गए थे। विध्वंस के दौरान आडवणी अयोध्या में मौजूद थे। विध्वंस के लिए वे षड्यंत्र के आरोपी हैं और मामला कोर्ट में है। लालकृष्ण आडवाणी की पार्टी भाजपा देश की सत्ता में है, लेकिन आज वे भाजपा मार्गदर्शक मंडल में हैं।
राम मंदिर के पक्ष देश में माहौल बनाने के लिए आडवाणी ने 1990 में सोमनाथ से अयोध्या के लिए रथ यात्रा निकाली थी। इसी यात्रा से अयोध्या आंदोलन को धार मिली थी। देश के कई शहरों और गांवों से लोग अयोध्या में कारसेवा करने के लिए पहुंच रहे थे। अयोध्या समेत देश के कई हिस्सों में 'राम लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे' का नारा गूंज रहा था। आडवाणी अयोध्या आंदोलन से भाजपा के सबसे बड़े हिंदुत्व का चेहरा बन गए थे। विध्वंस के दौरान आडवणी अयोध्या में मौजूद थे। विध्वंस के लिए वे षड्यंत्र के आरोपी हैं और मामला कोर्ट में है। लालकृष्ण आडवाणी की पार्टी भाजपा देश की सत्ता में है, लेकिन आज वे भाजपा मार्गदर्शक मंडल में हैं।
Lal krishna Advani, Murli Manohar joshi
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
मुरली मनोहर जोशी
राम मंदिर आंदोलन से जुड़ा एक अहम नाम मुरली मनोहर जोशी है। पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के बाद मंदिर आंदोलन में जोशी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। छह दिसंबर को जब विवादित ढांचा गिराया गया तो जोशी भी अयोध्या में थे। जोशी ने अपने बेबाक भाषणों से आंदोलन को काफी तेज किया था।
राम मंदिर आंदोलन से जुड़ा एक अहम नाम मुरली मनोहर जोशी है। पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के बाद मंदिर आंदोलन में जोशी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। छह दिसंबर को जब विवादित ढांचा गिराया गया तो जोशी भी अयोध्या में थे। जोशी ने अपने बेबाक भाषणों से आंदोलन को काफी तेज किया था।
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विनय कटियार
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
विनय कटियार
राम मंदिर आदोलन को लेकर विनय कटियार के तेवर शुरू से सख्त थे और आज भी वैसे ही हैं। कटियार कट्टर हिंदुत्व का चेहरा माने जाते थे। विध्वंस के दौरान विनय कटियार अयोध्या में मौजूद थे और वो इस मामले में आरोपी हैं। कटियार पर कारसेवकों को विवादित ढांचा तोड़ने के लिए उकसाने का आरोप है। वो मौजूदा समय में भाजपा के महज सदस्य हैं और न पार्टी में उनकी भूमिका है और न ही सरकार में।
राम मंदिर आदोलन को लेकर विनय कटियार के तेवर शुरू से सख्त थे और आज भी वैसे ही हैं। कटियार कट्टर हिंदुत्व का चेहरा माने जाते थे। विध्वंस के दौरान विनय कटियार अयोध्या में मौजूद थे और वो इस मामले में आरोपी हैं। कटियार पर कारसेवकों को विवादित ढांचा तोड़ने के लिए उकसाने का आरोप है। वो मौजूदा समय में भाजपा के महज सदस्य हैं और न पार्टी में उनकी भूमिका है और न ही सरकार में।
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उमा भारती
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
उमा भारती
उमा भारती को राजनीतिक पहचान अयोध्या आंदोलन से मिली। विध्वंस के दौरान उमा भारती अयोध्या में मौजूद रहीं और वह भी इस मामले में आरोपी हैं। हिंदुत्व का चेहरा और फायर ब्रांड नेता के तौर पर उनकी पहचान बन चुकी थी। भाजपा नेताओं में उनकी तूती बोलती थी। मौजूदा समय में वह भाजपा में सिर्फ नेता हैं। उन्होंने मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में चुनाव लड़ने से मना कर दिया था।
उमा भारती को राजनीतिक पहचान अयोध्या आंदोलन से मिली। विध्वंस के दौरान उमा भारती अयोध्या में मौजूद रहीं और वह भी इस मामले में आरोपी हैं। हिंदुत्व का चेहरा और फायर ब्रांड नेता के तौर पर उनकी पहचान बन चुकी थी। भाजपा नेताओं में उनकी तूती बोलती थी। मौजूदा समय में वह भाजपा में सिर्फ नेता हैं। उन्होंने मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में चुनाव लड़ने से मना कर दिया था।