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पाकिस्तान में जन्मे अयोध्या आंदोलन के नायक की कहानी, 10 विशेष बातें और तस्वीरें

Sat, 09 Nov 2019 01:36 PM IST
प्रशांत कुमार प्रशांत कुमार द्विवेदी, अमर उजाला, जम्मू/श्रीनगर
प्रशांत कुमार द्विवेदी, अमर उजाला, जम्मू/श्रीनगर Published by: प्रशांत कुमार Updated Sat, 09 Nov 2019 01:36 PM IST
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Ayodhya Verdict: Final Decision Of Supreme Court and lal krishna advani story
लालकृष्ण आडवाणी - फोटो : सोशल मीडिया

अयोध्या आंदोलन के शुरू होते ही देश की सियासत में भाजपा का एक नया रूप सामने उभरा। सियासत में हिंदुत्व का तानाबाना बुनकर भाजपा लोगों के बीच पैठ बनाने में जुटी गई। अयोध्या आंदोलन ने भाजपा को कई कोहिनूर दिए या कहें दिग्गजों ने राममंदिर आंदोलन के जरिए देश की सियासत में खुद को स्थापित किया। इन्हीं नामों में एक नाम है लालकृष्ण आडवाणी। भाजपा के पितामह जिन्होंने अविभाजित भारत के सिंध प्रांत में 8 नवंबर 1927 को जन्म लिया। विभाजन के बाद सिंध प्रांत पाकिस्तान का हिस्सा बना। इसके बाद आडवाणी परिवार मुंबई आ गया।





आगे की स्लाइड में पढ़िए- राममंदिर आंदोलन के नायक की कहानी

Ayodhya Verdict: Final Decision Of Supreme Court and lal krishna advani story
लालकृष्ण आडवाणी

लालकृष्ण आडवाणी के पिता का नाम कृष्णचंद आडवाणी और माता का नाम ज्ञानी देवी था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा पाकिस्तान के कराची में हुई। इसके बाद उन्होंने सिंध में कॉलेज में दाखिला लिया। मुंबई में आडवाणी ने कानून की शिक्षा ली।

Ayodhya Verdict: Final Decision Of Supreme Court and lal krishna advani story
अटल बिहारी वाजपेयी-लालकृष्ण आडवाणी - फोटो : social media

लाल कृष्ण आडवाणी 14 साल की उम्र में संघ से जुड़ गए थे। अयोध्या में राम मंदिर बने, इसको लेकर 1990 में गुजरात के सोमनाथ से रथ यात्रा शुरू की गई। इस आंदोलन में आडवाणी की भूमिका ने भाजपा को एक नया रूप दिया।


 

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लालकृष्ण आडवाणी

भाजपा में नंबर दो की हैसियत पर रहे आडवाणी व पार्टी की सलाह पर भाजपा ने राम मंदिर निर्माण के वादे को अपने घोषणा पत्र में प्रमुखता दी। आडवाणी खुलकर राम मंदिर निर्माण के समर्थन में आए जिससे अस्तित्व के लिए जूझ रही भाजपा लोकसभा में दो से बढ़कर 86 सीटों तक पहुंच गई। 

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लाल कृष्ण आडवाणी

यह चुनावी जीत तो एक नींव थी। भाजपा ने लोगों की नब्ज टटोल ली थी। इसके बाद भाजपा और आडवाणी पूरे दम से इस आंदोलन को मूर्त रूप देने में जुट गए और इसी को लेकर एक नए अध्याय का आरंभ हुआ।

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