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विस्थापन की चौथाई सदी बाद भी कश्मीरी पंडितों के दर्द का अंत नहीं

Wed, 20 Jan 2016 12:00 PM IST
Updated Wed, 20 Jan 2016 12:00 PM IST
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विस्थापन की चौथाई सदी बाद भी कश्मीरी पंड‌ितों के दर्द का अंत नहीं

After a quarter century of displacement not end the pain
26 साल। यानी चौथाई सदी से भी ज्यादा। इतना ही अरसा बीत चुका है आतंकवाद के शिकार कश्मीरी पंडितों को अपना घर-द्वार छोड़े हुए। इन बरसों में एक जवान पीढ़ी बुढ़ा गई। और एक नयी पीढ़ी पैदा होकर तमाम मुसीबतों के बीच जवान होकर सवालों के जवाब तलाशते भटक रही है।

विस्थापन की चौथाई सदी बाद भी कश्मीरी पंड‌ितों के दर्द का अंत नहीं

After a quarter century of displacement not end the pain

इस बीच इनके नाम पर सियासत तो सबने की पर इनकी बिखरी हुई जिंदगी को संवारने का काम किसी से न हो सका। घाटी से कश्मीरी पंडितों के विस्थापन के 26 सालों में हजारों विस्थापित बुजुर्ग घर वापसी की आस मन में लिए ही चल बसे। हजारों बच्चे विस्थापन के दौर में जन्मे और अब युवा हो गए।

विस्थापन की चौथाई सदी बाद भी कश्मीरी पंड‌ितों के दर्द का अंत नहीं

After a quarter century of displacement not end the pain

करीब 57 हजार परिवारों की सात लाख की आबादी रोजगार, गुजर बसर और परिवार की सुरक्षा के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में चली गई। पूरी बिरादरी के लिए अपने अस्तित्व के साथ सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखना बड़ी च़ुनौती हो गई है।

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विस्थापन की चौथाई सदी बाद भी कश्मीरी पंड‌ितों के दर्द का अंत नहीं

After a quarter century of displacement not end the pain

कश्मीर में आतंकवाद और अलगाववाद की आग में झुलसे कश्मीरी पंडितों की घाटी में घर वापसी की बातें बहुत हुईं लेकिन अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। सरकार ने जम्मू और उधमपुर में कैंप बनाकर अस्थायी तौर पर इनके रहने की व्यवस्थाएं तो की हैं लेकिन उनकी मुश्किलें बनी हुई हैं।

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विस्थापन की चौथाई सदी बाद भी कश्मीरी पंड‌ितों के दर्द का अंत नहीं

After a quarter century of displacement not end the pain

विस्थापित राधे शाम पंडिता का कहना हैं कि हमारे बच्चे कश्मीरी नहीं जानते। वे डर के मारे घाटी में अपने पुश्तैनी घरों को देखने नहीं गए। विरासत खतरे में है। घाटी में मंदिरों पर कब्जा हैं, घरों पर कब्जा हो चुका है। आखिर विस्थापित जाना भी चाहें तो कहां जाएं।

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