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कश्मीरी पंडितों के पलायन के 30 साल: मस्जिदों से हो रहे थे एलान, हमसे बाहर आने के लिए कहा गया, फिर...
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Sun, 19 Jan 2020 11:41 AM IST
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19 जनवरी 1990 कश्मीरी पंडितों का पलायन
- फोटो : अमर उजाला, फाइल फोटो
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घाटी में रहने वाले कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए 19 जनवरी प्रलय का दिन माना जाता है, क्योंकि वर्ष 1990 में हालात बिगड़ने के कारण इसी तारीख को कश्मीरी पंडित समुदाय ने कश्मीर घाटी से पलायन करना शुरू कर दिया था। आज इस तारीख को तीस साल पूरे हो गए हैं। आज के दिन को कश्मीरी पंडित ‘होलोकॉस्ट/एक्सोडस डे’ (प्रलय/बड़ी संख्या में पलायन की तारीख) के तौर पर मनाते हैं।
पढ़िए उस भयानक रात की कहानी...
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19 जनवरी 1990 कश्मीरी पंडितों का पलायन
- फोटो : सोशल मीडिया
मई 1990 तक करीब पांच लाख कश्मीरी पंडित जान बचाने के लिए अपनी मातृभूमि को छोड़ कश्मीर से पलायन कर चुके थे, जो स्वतंत्रता के बाद भारत का सबसे बड़ा पलायन माना जाता है।
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19 जनवरी 1990 कश्मीरी पंडितों का पलायन
- फोटो : सोशल मीडिया
इसी के चलते हर वर्ष 19 जनवरी को जहां कहीं भी कश्मीरी पंडित रहते हैं, वहां वह इस तारीख को ‘होलोकॉस्ट/एक्सोडस डे’ (प्रलय/बड़ी संख्या में पलायन की तारीख) के तौर पर मनाते हैं।
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19 जनवरी 1990 कश्मीरी पंडितों का पलायन
- फोटो : सोशल मीडिया
इस तारीख को जो भी कश्मीरी पंडित याद करता है, उसे वह यादें सिहरा कर रख देती हैं। उनके मुंह से सिर्फ यही शब्द निकलते हैं कि ऐसा दिन किसी की भी जिंदगी में कभी भी न आए। कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति के अध्यक्ष संजय तिकू ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में अपना अनुभव साझा किया।
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19 जनवरी 1990 कश्मीरी पंडितों का पलायन
- फोटो : सोशल मीडिया
उनके अनुसार वर्ष 1990 में आतंकवाद के शुरू होते ही कश्मीरी समुदाय के लोग जो उनके साथ रहते थे, उनका व्यवहार भी बदल गया। उसके पीछे दो कारण हो सकते हैं या तो वह आतंकवाद से प्रभावित हो चुके थे या तो वह जानते थे कि कश्मीरी पंडित भाइयों को नुकसान पहुंचाया जा सकता है।
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