करीब 30 साल बाद कश्मीर में एक बार फिर सिनेमा का दौर शुरू होने जा रहा है और अबकी बार यहां के लोग महानगरों की तरह पूर्ण सुविधाओं से लैस मल्टीप्लेक्स में ब्लॉकबस्टर फिल्मों का आनंद ले पाएंगे। सितंबर के महीने में कश्मीर का पहला मल्टीप्लेक्स पूरी तरह से शुरू होने जा रहा है, जिसमें 520 लोगों के बैठने की क्षमता वाले तीन सिनेमा हॉल होंगे।
Cinema Hall in Srinagar: 30 साल बाद घाटी में ले सकेंगे बड़े पर्दे का आनंद, सितंबर में शुरू होगा मल्टीप्लेक्स
कश्मीर में एक बार फिर सिनेमा का दौर शुरू होने जा रहा है और अबकी बार यहां के लोग महानगरों की तरह पूर्ण सुविधाओं से लैस मल्टीप्लेक्स में ब्लॉकबस्टर फिल्मों का आनंद ले पाएंगे। सितंबर के महीने में कश्मीर का पहला मल्टीप्लेक्स पूरी तरह से शुरू होने जा रहा है।
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विकास धर ने अमर उजाला के साथ बात करते हुए बताया कि इंदिरा नगर में तैयार हो रहा मल्टीप्लेक्स कश्मीरी की परंपरागत स्थापत्य कला और आधुनिक स्थापत्य कला का संगम है। उन्होंने बताया कि इसकी लाबी में सीलिग के लिए खतमबंद (लकड़ी के छोटे-छोटे टुकड़ों को जोड़कर बनाए जाने वाला डिजाइन) का इस्तेमाल किया है। इसमें 520 लोगों की क्षमता के तीन ऑडिटोरियम इस मल्टीप्लेक्स में होंगे, जिसमें एक ही समय पर तीन अलग-अलग फिल्में देख सकेंगे।
विकास धर ने बताया कि हमने देश के सबसे बड़े एंटरटेनमेंट प्रोवाइडर 'इनॉक्स ग्रुप' के साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट की शुरुआत की है। उन्होंने बताया, 'मेरे पिता जी से पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा था कि श्रीनगर में युवाओं के मनोरंजन के साधनों की कमी है। तो उसपर उन्होंने उनसे कहा कि जिस मनोरंजन देश भर के लोग आनंद लेते हैं। अब कश्मीर के लोगों को भी उसी तरह का मनोरंजन कराया जाएगा।'
विकास ने कहा कि इस मल्टीप्लेक्स में कश्मीर का सबसे बड़ा फन ज़ोन भी रहेगा, जहां बच्चे आनंद ले सकेंगे। इसके अलावा फूड कोर्ट भी रहेगा। लोगों के लिए अच्छा अनुभव रहेगा। इसलिए हमने इसकी शुरुआत की है। धर ने कहा कि बॉलीवुड और कश्मीर का बहुत पुराना नाता रहा है, इस रिश्ते को हम फिरसे उजागर करना चाहते हैं।
जानकारी के अनुसार, मल्टीप्लेक्स का काम लगभग पूरा हुआ चुका है। बस अब सभी तैयारियों को अंतिम रूप देने में कारीगर और तकनीशियन जुटे हुए हैं। सीटें, इंटीरियर, सीलिंग, आदि का काम पूरा हो चुका है। अब कुछ ही दिनों में साउंड सिस्टम का काम भी पूरा हो जाएगा और सितम्बर के अंत में यहां के लोग देश के महानगरों में स्थित मल्टीप्लेक्स की तरह पूरी सुविधाओं से लैस और आधुनिक मल्टीप्लेज़ में बोलकबूस्टर फिल्मों का आनंद ले पाएंगे।
बड़े परदे पर फिल्म देखने 300 किलोमीटर दूर जाना पड़ता था
कश्मीर में सिनेमा हॉल बंद हो जाने की वजह से कुछ समय पहले तक कई युवा ऐसे भी हैं जिनको पता भी नहीं है कि सिनेमा हॉल कैसा होता है और मल्टीप्लेक्स क्या है। हालांकि, यहां के युवाओं को 300 किमी दूर जम्मू आकर फिल्म देखने के अपने सपने को पूरा करना पड़ता था। घाटी के युवा जो बाहर पढ़ रहे थे या फिर रोजी-रोजगार के सिलसिले में निकले थे, वे ही रुपहले पर्दे का आनंद ले पाए, अन्यथा घर पर टीवी और सोशल मीडिया प्लेटफार्म के जरिये ही वे अपने शौक पूरे करने को मजबूर थे।
आतंकियों की धमकी से 19 सिनेमा हॉल हो गए थे बंद
बता दें कि कश्मीर में 1990 में आतंकी संगठनों की धमकियों और हमलों के कारण सभी सिनेमा हॉल बंद हो गए थे। जानकार बताते हैं कि आतंकवाद के दौर में घाटी में एक-एक कर 19 सिनेमा हॉल बंद हो गए थे। इनमें अकेले नौ सिनेमा हॉल - रीगल, पैलेडियम, खयाम, फिरदौस, शाह, नाज, नीलम, शिराज व ब्रॉडवे श्रीनगर में थे। लाल चौक के पास पैलेडियम और उससे कुछ दूरी पर नीलम सिनेमा हॉल थे, जहां काफी भीड़ होती थी। आतंकी संगठनों की धमकियों और हमलों के कारण ये बंद होते गए।