प्रकृति प्रेमियों को यदि राजस्थान में ही हिमांचल और उत्तराखंड जैसा अहसास हो जाए, तो कैसा रहे। बारिश में अरावली की पहाड़ियां आपको एेसा ही अहसास करवाने में सक्षम हैं। इस समय झीलों की नगरी के नाम से विख्यात उदयपुर में प्रकृति गजब की मेहरबान है। उदयपुर में ही है अरावली के पहाड़ों में बहने वाला सबसे ऊंचा झरना। राजस्थान के बारे में ऐसे ही नहीं कहा जाता कि 'जाने क्या दिख जाए'।
55 मीटर ऊंचाई से गिरता है पानी
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55 मीटर ऊंचा भील की बेरी झरना
- फोटो : amar ujala
करीब 55 मीटर की ऊंचाई से गिरने वाला 'भील बेरी का झरना' प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। दरअसल ये पूरा इलाका ही किसी हिल स्टेशन जैसा लगता है, जहां हर साल मानसून में हजारों की संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। यहां का वन्यजीवन हमेशा से ही वन्यजीव प्रेमियों और इसमें रुचि रखने वालों के लिए कौतूहल का केंद्र रहा है।
शाहरूख की 'चैन्नई एक्सप्रेस' में दिखे दूधसागर जैसा नजारा
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गोरमघाट सैक्शन से गुजरती एक ट्रेन
शाहरूख की 'चैन्नई एक्सप्रेस' फिल्म में दिखाए गए मनोरम दूध सागर झरने जैसा ही उदयपुर का भील की बेरी झरना है। कर्नाटक और गोवा राज्यों की सीमा पर स्थित दूधसागर झरने जैसा दिखाई पड़ता है, क्योंकि यहां से एक रेलवे लाइन भी निकलती है, जिसमें बैठे हुए यात्रियों को ये मनमोहक नजारा देखने को मिलता है। यहां ट्यूरिस्ट को मावली-मारवाड़ जंक्शन के बीच में पड़ने वाले गोरमघाट में रेल सफारी का काफी शानदार अनुभव होता है।
ट्रैकिंग के लिए एकदम अनुकूल है ये जगह
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गोरमघाट रेल सैक्शन का शानदार नजारा
इको ट्रेकिंग के लिए गोरमघाट और भील की बेरी घुम्मकड़ों के लिए एकदम अनुुकूल जगह है। यहां पाई जाने वाली वनस्पतियों और वन्यजीवन के बारे में आपको स्थानीय गाइड और वन विभाग के रेंजर्स काफी जानकारी दे देंगे।
ट्रेन से या सड़क मार्ग से एेसे पहुंचे गोरमघाट
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ट्रेन की छत पर बैठकर गोरमाघाट के नजारों का आनंद लेते यात्री,हालांकि ऐसे करना दंडनीय अपराध है
गोरमघाट में ट्रेन सफारी का आनंद उठाना चाहते हैं तो उदयपुर के मावली रेलवे स्टेशन से चलने वाली मीटर गेज ट्रेन से गोरमघाट स्टेशन पहुंच सकते हैं। यदि आप सड़क मार्ग से जाना चाहते हैं तो मारवाड़ से होते हुए सीधे गोरमघाट पहुंच सकते हैं।