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Hindi News ›   Rajasthan ›   Bulldozer Threat in Jaipur NGT Orders Eviction of 150 Factories on 2.9 Hectares of Forest Land

जयपुर में 150 फैक्ट्रियों पर लटकी बुलडोजर की तलवार: एनजीटी का सख्त आदेश, वन विभाग को मिलेगी 2.9 हेक्टेयर जमीन

Fri, 18 Sep 2026 04:42 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Fri, 18 Sep 2026 04:42 PM IST
सार

जयपुर में वन विभाग की जमीन पर वर्षों से चल रहीं करीब 150 औद्योगिक इकाइयों पर NGT के आदेश से संकट बढ़ा है। 30 दिन में कब्जा लौटाना होगा।

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Bulldozer Threat in Jaipur NGT Orders Eviction of 150 Factories on 2.9 Hectares of Forest Land
NGT - फोटो : NGT

विस्तार

झोटवाड़ा के पास बीड़ पापड़ गांव में वन विभाग के नाम दर्ज जमीन पर वर्षों से चल रही औद्योगिक गतिविधियां अब सवालों के घेरे में हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की भोपाल बेंच ने खसरा नंबर 7/2 की करीब 2.9 हेक्टेयर जमीन का कब्जा 30 दिन में वन विभाग को सौंपने के निर्देश दिए हैं। स्थानीय स्तर की जानकारी के अनुसार इस जमीन पर करीब 150 छोटी-बड़ी फैक्ट्रियां और अन्य औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं।

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राजस्व रिकॉर्ड में जमीन वन विभाग के नाम दर्ज होने के बावजूद यहां लंबे समय से औद्योगिक गतिविधियां चलती रहीं। एनजीटी के आदेश के बाद अब जमीन को खाली कराने की कार्रवाई और वहां संचालित इकाइयों के भविष्य को लेकर स्थिति महत्वपूर्ण हो गई है।

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मौके पर पहुंची टीम तो पैमाइश में आई परेशानी

मामले की जांच के दौरान वन और राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जमीन का सर्वे करने की कोशिश की थी। सुनवाई के दौरान सामने आया कि जमीन पर बड़ी संख्या में निर्माण और औद्योगिक इकाइयां खड़ी हो चुकी हैं। ऐसे में टीम के लिए पारंपरिक तरीके से जमीन की पैमाइश करना भी मुश्किल हो गया। इससे यह स्थिति सामने आई कि रिकॉर्ड में वन भूमि के रूप में दर्ज जमीन पर धीरे-धीरे पूरा औद्योगिक क्षेत्र विकसित हो गया।

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RIICO के रिकॉर्ड में भी नहीं मिला वैध आवंटन

मामले में RIICO की भूमिका भी सामने आई। ट्रिब्यूनल के समक्ष यह तथ्य रखा गया कि RIICO के पास इस जमीन के वैध आवंटन से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। इसके बावजूद RIICO के एक वरिष्ठ अधिकारी की ओर से जमीन को नियमित प्रक्रिया के तहत RIICO के नाम आवंटित करने का सुझाव दिया गया था।

एनजीटी ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। ट्रिब्यूनल ने वन भूमि के गैर-वानिकी इस्तेमाल से जुड़े कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि आवश्यक केंद्रीय अनुमति के बिना वन भूमि का इस तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। आदेश में ऐसे इस्तेमाल को बाद में नियमित करने की दलील को भी खारिज किया गया है।

कब्जा लेने में पुलिस की मदद भी ली जा सकती है

ट्रिब्यूनल ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक और गृह विभाग को जमीन का कब्जा वन विभाग को वापस दिलाने के निर्देश दिए हैं। जरूरत पड़ने पर पुलिस बल की सहायता लेने को भी कहा गया है। ऐसे में अब कार्रवाई की स्थिति में मौके पर संचालित औद्योगिक इकाइयों पर भी इसका असर पड़ सकता है। हालांकि करीब 150 इकाइयों का आंकड़ा NGT के आदेश में दर्ज नहीं है। यह संख्या स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर सामने आई है।

वन अधिकारियों की भूमिका की भी होगी जांच

मामले में एनजीटी ने वन विभाग के उन अधिकारियों की भूमिका की जांच के निर्देश दिए हैं, जिनके कार्यकाल में कथित अतिक्रमण बढ़ा। विभागीय जांच के जरिए यह देखा जाएगा कि वन भूमि पर औद्योगिक गतिविधियां विकसित होने के दौरान संबंधित अधिकारियों की ओर से क्या कार्रवाई की गई।

अब मामला सिर्फ जमीन का कब्जा वापस लेने तक सीमित नहीं है। सवाल यह भी है कि वन विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज जमीन पर इतने लंबे समय तक औद्योगिक गतिविधियां कैसे चलती रहीं और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होगी।

150 इकाइयों के कारोबार पर भी नजर

स्थानीय जानकारी के मुताबिक इस क्षेत्र में करीब 150 औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं। यदि कब्जा हटाने की कार्रवाई आगे बढ़ती है तो इन इकाइयों के कारोबार और उनसे जुड़े रोजगार पर असर पड़ने की आशंका है। हालांकि, इन इकाइयों को लेकर आगे क्या कार्रवाई होगी, यह प्रशासन की आगामी कार्रवाई से स्पष्ट होगा।

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