राजसमंद में हुए अफराजुल खान लाइव हत्याकांड को लेकर इस्लामिक कट्टरपंथियों के निशाने पर रहने वाली लेखिका ने अपने विचार पेश किए हैं। बांग्लादेश की विवादित लेखिका तस्लीमा नसरीन ने इस हत्याकांड को लेकर कहा है कि हिंदू संगठन और उसके लोग आईएसआईएस के आंतकियों की तरह क्यों बर्बरतापूर्ण तरीके अपना रहे हैं। तस्लीमा ने और भी बहुत कुछ बोला है।
शंभूलाल नहीं है मानसिक रोगी
तस्लीमा नसरीन ने अपने बंगाली भाषा के लेख में लिखा कि अफराजुल की हत्या का वीडियो देखने पर मुझे वो बिल्कुल भी मानसिक रूप से कमजोर नहीं लगा बल्कि वो एक आम हत्यारे की तरह बेरहमी से उसका कत्ल कर रहा था।
उसको नहीं था गिरफ्तारी का डर
नसरीन ने लिखा है कि जिस तरह आईएसआईएस के लड़ाकों को गिरफ्तारी या मरने का कोई डर नहीं है उसी तरह शंभूलाल ने भी इस हत्या को अंजाम देते वक्त यही सोचा होगा कि मेरा ऐसा काम करने पर मुझे कोई गिरफ्तार करने नहीं आएगा या मुझे हिंदू संगठनों का ही संरक्षण मिल जाएगा।
भारत में असहिष्णुता चर्म पर
विवादित बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने आगे लिखा कि जब मैंने शंभूलाल रैगर के लाइव मर्डर वीडियो की ट्विटर पर आलोचना की तब मुझे लोगों ने खूब गालियां दीं और मुझसे उसके खिलाफ एक भी शब्द बोलने नहीं बोलने को कहा गया। मैंने जब गोरक्षकों द्वारा एक मुस्लिम शख्स को मौत के घाट उतार दिए जाने को लेकर भर्त्सना की तो उस दौरान भी मुझे काफी अपमानजनक बातें सुनने को मिलीं। नसरीन ने अपने लेख में लिखा है कि इस वक्त हिंदुस्तान में असहिष्णूता चरम पर है।
मीडिया पर साधा निशाना
नसरीन ने शंभूलाल रैगर के मामले की कवरेज देने पर मीडिया को जमकर कोसा। उन्होनें लिखा कि मीडिया ने रैगर की हैवानियत को सीरिया में आए दिन आईएसआईएस द्वारा लोगों के सिर काटे जाने की एक आम घटना की तरह दिखाया। नसरीन ने कहा कि आईएसआईएस के आतंकी चेहरे पर नकाब रखकर हत्याएं करते हैं मगर शंभूलाल ने तो साफ साफ भड़काऊ शब्द कहते हुए ये लाइव मर्डर किया है, जो आम बात बिल्कुल भी नहीं है।