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देश की 16 बावड़ियों में ये 6 क्यों हैं खास, जिन पर जारी हुए हैं डाक टिकट
Sat, 30 Dec 2017 05:43 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 30 Dec 2017 05:43 PM IST
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आभानेरी की चांद बावड़ी
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केन्द्र सरकार की ओर से अभी हाल ही देश की 16 प्राचीन बावड़ियों पर डाक टिकट जारी किए गए हैं। इनमें 6 बावड़ियां राजस्थान से ताल्लुक रखती हैं। यहां सबसे पहले बात करते हैं राजस्थान में दौसा के पास स्थित आभानेरी की चांद बावड़ी की। इसे भूल-भुलैया वाली बावड़ी भी कहा जाता है। कहा जाता है कि यहां सीढ़ियां ऐसे बनी हुई हैं कि आप जिस रास्ते से नीचे जाते हैं उस रास्ते से ऊपर नहीं आ सकते। बावड़ी में 3,500 सीढ़ियां हैं।
स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है रानीजी की बावड़ी
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रानीजी की बावड़ी
राजस्थान के बूंदी शहर में स्थित है रानीजी की बावड़ी। यहां बावड़ी में कई कुओं का निर्माण किया गया है जिनमें बारिश के दौरान पानी भरा रहता है। दूरदराज से पर्यटक इसे देखने के लिए यहां आते हैं। अपनी स्थापत्य कला के लिए ये खास पहचान रखती है।
तूरजी का झालरा जोधपुर
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तूरजी का झालरा जोधपुर
जोधपुर अपनी स्थापत्य कला के लिए पूरे देशभर में प्रसिद्ध है। इसे सूर्य नगरी के नाम से भी जाना जाता है। यहीं स्थित है तूरजी का झालरा। लाल बलुआ पत्थर से इस बावड़ी का सौन्दर्य निखर आया है।
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सीढ़ियों और बरामदों के लिए विख्यात
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पन्ना मियां की बावड़ी, जयपुर
जयपुर के आमेर के पास स्थित है पन्ना मियां की बावड़ी। इस बावड़ी को स्थानीय लोग पन्न मीना की बावड़ी भी कहते हैं। इस बावड़ी के एक ओर जयगढ़ दुर्ग और दूसरी ओर पहाड़ों की नैसर्गिक सुंदरता है। बावड़ी अपनी विशेष आकार की सीढ़ियों और बरामदों के लिए विख्यात है।
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दो कुंडों को संयुक्त रूप से कहते हैं नागर सागर कुंड
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नागर सागर कुंड
बूंदी के केंद्र में चोगन गेट के पास दो कुंड हैं। जिन्हें जनानासागर और गंगा सागर कहा जाता था, लेकिन अब इसे संयुक्त रूप से नागर सागर कुंड कहा जाता है।
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