पानीपत के एक रिटायर्ड फौजी की बेटी और डॉक्टर की बहन अनुज नेहरा ने अपने पहले ही प्रयास में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में पहला स्थान हासिल किया है। इसके लिए उन्होंने लगातार पांच साल से रोजाना दस से बारह घंटे तक पढ़ाई की है, सोशल मीडिया से दूरी बनाकर किताबों को अपना दोस्त बनाया। लेकिन अभी भी उनका सपना यूपीएससी पास करना है, जिसके लिए वे अभी भी मेहनत कर रही हैं।
PCS 2018: पांच साल की मेहनत फिर पहले प्रयास में टॉपर बनी बेटी, बड़े काम के हैं अनुज के ये फार्मूले
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दो बार यूपीएससी की परीक्षा को पूरा न कर पाना उनके लिए अब जूनून बन चुका है और उन्होंने हौंसला बुलंद करते हुए अपनी पढ़ाई जारी रखी और यूपी की पीएससी परीक्षा को पास किया। पिछली बार भी यूपीएससी में वे सिर्फ दो अंकों से रह गईं थी। उन्होंने अपने माता-पिता और भाई का सपना तो पूरा कर लिया है, अब वे अपने सपने को पूरा करने की जद्दोजहद करेंगी। परीक्षा का परिणाम आते ही उनके घर बधाई देने वालों का तांता लगना शुरू हो गया। उन्होंने अपनी कामयाबी का सारा श्रेय अपने बड़े भाई विकास, अपने पिता अश्बीर सिंह व माता ऊषा को दिया है।अनुज नेहर ने बताया किया उनकी स्कूली शिक्षा पानीपत के एनएफएल टाउनशिप के केंद्रीय विद्यालय से हुई है। इसके बाद उन्होंने 2015 में दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज से कैमिस्ट्री ऑनर्स की पढ़ाई की।
उन्होंने बताया कि 2008 में दसवीं की परीक्षा में 97 प्रतिशत अंक आए थे। इसके बाद 12वीं नॉन मेडिकल में 2010 में उनके 94 प्रतिशत अंक आए। 2013 में स्नातक करने के बाद वे सिविल सर्विस की तैयारी में जुट गई। उन्होंने बताया कि 2014 में वे सही तैयारी नहीं कर पाई थी लेकिन 2015 से लेकर 2020 तक करीब पांच साल उन्होंने कठिन परिश्रम किया है ओर ये मुकाम हासिल किया है। उनके परिवार में चार सदस्य हैं, जिसमें उनके पिता अश्बीर सिंह जाट रैजिमेंट से रिटायर्ड फौजी हैं, उनकी माता ऊषा गृहिणी हैं। उनके बड़े भाई विकास रोहतक पीजीआई में मास्टर ऑफ सर्जन हैं, जो अब पीजी भी पूरा कर चुके हैं।
यूपीएससी का सिलेबस आया काम
अनुज बताती हैं कि उन्होंने मेहनत तो यूपीएससी की परीक्षा के लिए की थी लेकिन दो बार विफल होने के बाद उन्होंने और मेहनत की। इसी बीच उन्होंने उत्तर प्रदेश के लोक सेवा आयोग की परीक्षा दी और सफल हुई। उन्होंने बताया कि इसके लिए उन्हें ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी। यूपीएससी का सिलेबस ही उनके काम आया, जो वे पढ़-पढ़कर अपने जहन में उतार चुकी थी। अनुज ने बताया कि उन्हें यकीन ही नहीं था कि इस परीक्षा में उनका पहला नंबर आएगा। बस उन्होंने पूरी लगन, मेहनत और ध्यान लगाकर पढ़ाई की और परीक्षा दी। इसके बाद शुक्रवार को जब रिजल्ट आया तो उन्हें पता चला कि उन्होंने पहला रैंक हासिल करते हुए पूरे देश में टॉप किया है लेकिन यकीन नहीं आया। बार-बार रिजल्ट को देखा, कंफर्म किया, तब यकीन आया। उन्हें उम्मीद थी कि वे टॉप 100 या टॉप 50 में अपनी जगह बना लेंगी।
अब महिलाओं, बच्चों व शिक्षा के लिए करेंगी काम
अनुज बताती हैं कि ये उनकी सफलता की पहली सीढ़ी है। वे सरकारी ओहदे पर रहते हुए मुख्य रूप से महिला उत्थान, शिक्षा वर्ग और बच्चों के लिए काम करना चाहती हैं। उन्होंने बताया कि आज भी देश में कुछ ऐसी जगह हैं, जहां महिलाएं घरों से बाहर नहीं निकल पा रही हैं, बच्चों को शिक्षा नहीं मिल पा रही हैं। ऐसे समय में हमारे देश को नया टैलेंट और होनहार लोगों की जरूरत हैं।