कोरोना की तीसरी लहर की दस्तक भले ही अभी न हो, लेकिन वायरल फीवर के प्रकोप ने मुसीबतें बढ़ा दी हैं। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बाद शुरू हुए वायरल फीवर का रूप पूरी तरह से बदला नजर आ रहा है। वायरल फीवर से संक्रमित व्यक्ति में कोरोना जैसे लक्षण दिख रहे हैं। साथ ही मरीजों को यह बुखार लंबा कष्ट दे रहा है। गोरखपुर जिला अस्पताल की मेडिसिन विभाग की ओपीडी में करीब 50 प्रतिशत मरीज वायरल फीवर के आ रहे हैं। अन्य 50 प्रतिशत मरीजों में डायरिया, कालरा और टायफायड के लक्षण देखने को मिल रहे हैं। इस वजह से डॉक्टर भी चिंतित है। जानकारी के मुताबिक, वायरल फीवर के मरीजों के गले में खराश, बदन दर्द के साथ तेज बुखार और दस्त की शिकायतें हैं। ऐसे मरीज बड़ी संख्या में जिला अस्पताल की ओपीडी में पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल के मेडिसिन विभाग की तीन ओपीडी में गुरुवार को करीब 500 मरीज इलाज के लिए आए थे। इनमें 50 प्रतिशत मरीजों में वायरल फीवर की समस्या देखने को मिली है।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज।
- फोटो : अमर उजाला।
यही हाल बीआरडी मेडिकल कॉलेज की मेडिसिन विभाग की ओपीडी का भी है। यहां हर पांच में तीन मरीज वायरल फीवर के मिल रहे हैं। चिंता की बात यह है कि ओपीडी में बच्चों से लेकर अधेड़ तक वायरल फीवर के कारण बेहाल हैं। कुछ मरीजों में ऑक्सीजन लेवल कम होने की समस्या भी मिल रही है।
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BRD medical college
- फोटो : अमर उजाला
ऐसे मरीजों का इलाज बीआरडी मेडिकल कॉलेज के कोविड वार्ड में चल रहा है। जबकि मरीजों की रिपोर्ट निगेटिव आई है। वहीं, वायरल फीवर की चपेट में बच्चे भी आ रहे हैं। बच्चों में बुखार के साथ-साथ दस्त और उल्टी की समस्या देखने को मिल रही है। जिला अस्पताल के पीकू वार्ड में 17 बेड पर 11 बच्चों का इलाज चल रहा है।
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गोरखपुर जिला अस्पताल।
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10 से 12 दिन कष्ट दे रहा वायरल फीवर
जिला अस्पताल के मेडिसिन विभाग के डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि वायरल फीवर के स्वरूप में बदलाव देखने को मिला है। आमतौर पर पहले वायरल फीवर चार से पांच दिन में ठीक हो जाता था, लेकिन इस बार मरीज 10 से 12 दिनों तक बुखार की चपेट में रह रहे हैं। इसकी वजह वायरस में म्यूटेशन भी हो सकता है। कई ऐसे भी मरीज मिले हैं, जिनमें कोविड के लक्षण दिखे हैं, लेकिन उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई है। ऐसे मरीजों का इलाज कोविड की ही तरह किया जा रहा है।
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डॉ. राजेश कुमार।
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दवाओं का असर बेहद कम
डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि इस बार बुखार तेजी से फैल रहा है। कुछ मरीजों में 102 से 104 फॉरेनहाइट तक बुखार मिल रहा है। यह बेहद गंभीर मामला है। इसके कारण मरीज बेहोश तक हो जा रहे हैं। कई मरीजों को झटके आने लगे हैं। यही कारण है कि सामान्य दवाओं का असर कम हो रहा है। ऐसे मरीजों को हाई लेवल की एंटीबॉयोटिक के साथ बुखार की दवाएं दी जा रही हैं।