गोरखपुर के कैंपियरगंज इलाके के रहने वाले भुआल और शोभा के तीन बेटे हुए। दंपती ने खून-पसीना बहाकर बेटों को पाल-पोसकर बड़ा किया। बेटे बड़े हुए तो मां-बाप बोझ बन गए और बेटों की बदसलूकी से आहत होकर मां-बाप ने घर छोड़ दिया और जौनपुर के वृद्धाश्रम में शरण ली।
मां शोभा की मौत के बाद बेटे ने अपने बेटे की शादी का हवाला देते हुए दाह संस्कार से मना कर दिया। मां का शव जौनपुर से गांव तक लाए जाने के बाद दहलीज तक नहीं ले जाया जा सका और न ही मुखाग्नि नसीब हुई। रिश्तेदारों की मदद से शव करमैनीघाट पर दफना दिया गया।
2 of 9
मृतक शोभा देवी की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कैंपियरगंज क्षेत्र के भरोहियां ग्राम पंचायत के रहने वाले किराना व्यापारी भुआल गुप्ता के तीन बेटे संजय, जग्गू, अज्जू और तीन बेटियां हैं। भुआल ने बताया कि एक साल पहले बड़े बेटे संजय की बदसलूकी से आहत होकर वह पत्नी शोभा के साथ घर से राजघाट के पास सुसाइड करने पहुंचे थे। वहां एक व्यक्ति ने समझाकर रोका और अयोध्या में रहने का ठिकाना मिलने की बात कही।
3 of 9
मृतक शोभा देवी के पति
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बुजुर्ग दंपती को अयोध्या में भी ठिकाना नहीं मिला तो मथुरा पहुंचे, वहां जौनपुर के वृद्धाश्रम का मोबाइल नंबर मिला। फोन पर बात करके जौनपुर विकास समिति वृद्धाश्रम पहुंचे। वहां संचालक रवि कुमार चौबे ने उन्हें शरण दी। रवि ने बताया कि, भुआल और शोभा कभी-कभी अपने छोटे बेटे अज्जू से बातचीत करते थे।
4 of 9
शोभा देवी
- फोटो : अमर उजाला
भुआल ने बताया था कि बड़ा बेटा संजय किराना की दुकान और मेडिकल स्टोर चलाता है, कैंपियरगंज में उसका आलीशान मकान भी है। वह कभी माता-पिता से बात नहीं करता था। इस बीच शोभा के पैर में लकवा मार गया। इलाज चल ही रहा था कि बीते 19 नवंबर को उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। रवि ने जौनपुर के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती कराया जहां 19 की ही रात में उनकी मौत हो गई।
5 of 9
शोभा देवी
- फोटो : अमर उजाला
डॉक्टरों ने बताया कि शोभा के गुर्दे में भी इंफेक्शन हो गया था। रवि ने सूचना देने के लिए भुआल से उनके बेटों का फोन नंबर मांगा तो उन्होंने पहले तो इन्कार कर दिया। बाद में उम्मीद जताई कि घर जाने पर अंतिम संस्कार अच्छे से हो सकेगा और उन्होंने छोटे बेटे अज्जू का मोबाइल नंबर दिया।