गोरक्षपीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गोरखपुर से चुनाव मैदान में उतारकर भाजपा ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं। पार्टी ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में रणनीतिक रूप से राजनीतिक बढ़त हासिल की है। साथ ही स्वामी प्रसाद मौर्य व दारा सिंह चौहान के पार्टी छोड़ने से होने वाले नुकसान की भरपाई करने का सटीक दांव चला है। गोरखपुर से मुख्यमंत्री की प्रत्याशिता का सीधा असर गोरखपुर, बस्ती, आजमगढ़ मंडल की 62 विधानसभा सीटों पर पड़ता है।
गोरखपुर सीट से मास्टर स्ट्रोक: पूर्वी यूपी में भाजपा की रणनीतिक बढ़त, 62 विधानसभा सीटों का समीकरण भी साधा
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गोरखपुर विश्वविद्यालय में राजनीतिशास्त्र के शिक्षक डॉ. महेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यूपी में कहीं से चुनाव लड़ सकते थे। अयोध्या व मथुरा से चुनाव लड़ते और जीतकर बड़ा संदेश देते, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। भाजपा ने गोरखपुर से चुनाव उन्हें मैदान में उतारकर बड़ा संदेश दिया है।
मुख्यमंत्री के गोरखपुर से चुनाव लड़ने का फायदा, गोरखपुर क्षेत्र के दस जिलों के साथ ही अयोध्या, आंबेडकर नगर, जौनपुर, सुल्तानपुर, गाजीपुर व चंदौली में भी मिलेगा। राम मंदिर आंदोलन में गोरक्षपीठ की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। गोरक्षपीठ व राम जन्मभूमि आंदोलन को अलग-अलग नजरिए से नहीं देखा जा सकता है। अयोध्या या फिर गोरखपुर शहर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ना एक जैसा ही माना जाएगा। दोनों का अपना-अपना महत्व भी है।
नुकसान की गुंजाइश कम रहेगी
शहर विधानसभा क्षेत्र भाजपा संगठन के लिहाज से गोरखपुर क्षेत्र का हिस्सा है। इसी क्षेत्र के पडरौना (कुशीनगर) से स्वामी प्रसाद मौर्य और मऊ के मधुबन से दारा सिंह चौहान 2017 में विधायक चुने गए थे। सरकार में मंत्री भी रहे, लेकिन चुनाव से पहले सपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। इसपर पार्टी नेतृत्व की रणनीति पर सवाल उठाए गए। अब पार्टी ने मुख्यमंत्री को गोरखपुर शहर से चुनाव मैदान में उतारकर रणनीतिक बढ़त हासिल करने का प्रयास किया है। राजनीति के जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरक्षपीठाधीश्वर भी हैं। उनकी पकड़ समाज के हर तबके में है। लिहाजा, स्वामी प्रसाद व दारा सिंह के पार्टी छोड़ने का बड़ा नुकसान भाजपा को नहीं उठाना पड़ेगा। सारे कील-कांटे दुरुस्त हो जाएंगे।
गोरखपुर-बस्ती मंडल में मिली थी बड़ी जीत
2017 के विधानसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर-बस्ती मंडल के सात जिलों की 41 सीटों पर खूब प्रचार किया था। इसी का नतीजा रहा कि भाजपा व उसके सहयोगी दलों को 37 सीटों पर जीत मिली थी। बस्ती मंडल के तीन जिलों की 13 सीटों पर एकतरफा जीत मिली थी। बस्ती मंडल में विपक्ष का खाता तक नहीं खुला था। गोरखपुर की नौ में आठ सीटें जीतने में भाजपा को कामयाबी मिली थी। इसी तरह देवरिया, कुशीनगर व महाराजगंज में भी भाजपा का प्रदर्शन शानदार था।
छठवें चरण में होगा गोरखपुर-बस्ती मंडल का चुनाव
गोरखपुर-बस्ती मंडल की 41 विधानसभा सीटों का चुनाव छठवें चरण होगा। इसके लिए नोटिफिकेशन तीन फरवरी को जारी किया जाएगा। नामांकन प्रक्रिया चार फरवरी से शुरू होगी। 11 फरवरी नामांकन की आखिरी तिथि है। तीन मार्च को मतदान होगा। 10 मार्च को चुनाव के नतीजे घोषित किए जाएंगे।
गोरखपुर, बस्ती व आजमगढ़ मंडल की इन विधानसभा सीटों पर योगी का अच्छा प्रभाव
गोरखपुर: गोरखपुर शहर, गोरखपुर ग्रामीण, सहजनवां, पिपराइच, कैंपियरगंज, बांसगांव (सुरक्षित), खजनी (सुरक्षित), चिल्लूपार व चौरीचौरा।
सिद्धार्थनगर: शोहरतगढ़, कपिलवस्तु (सुरक्षित), बांसी, इटवा व डुमरियागंजञ
बस्ती: कप्तानगंज, रुधौली, बस्ती सदर, महादेवा (सुरक्षित) व हर्रैया।
संतकबीरनगर: मेंहदावल, खलिलाबाद व धनघटा (सुरक्षित)।
महराजगंज: फरेंदा, नौतनवां, सिसवा, महराजगंज (सुरक्षित) व पनियरा।
कुशीनगर: खड्डा, पडरौना, तमकुहीराज, फाजिलनगर, कुशीनगर, हाटा व रामकोला (सुरक्षित)।
देवरिया: रुद्रपुर, देवरिया, पथरदेवा, रामपुर कारखाना, भाटपाररानी, सलेमपुर (सुरक्षित) व बरहज।
आजमगढ़: गोपालपुर, सगड़ी, मुबारकपुर, आजमगढ़ सदर, मेंहनगर (सुरक्षित), अतरौलिया, निजामाबाद, फूलपुर पवई, दीदारगंज व लालगंज (सुरक्षित)।
मऊ: घोसी, मधुबन, मोहम्मदाबाद गोहना (सुरक्षित) व मऊ सदर।
बलिया: बेलथरा रोड (सुरक्षित), रसड़ा, सिकंदरपुर, फेफना, बलिया सदर व बांसडीह।