आज हम आपको यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बारे में एक रोचक कहानी बताने जा रहे हैं। इस कहानी के माध्यम से हम आपको बताएंगे कि योगी आदित्यनाथ 12 साल पहले कैसे नायक बन गए थे।
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योगी आदित्यनाथ। (file)
- फोटो : अमर उजाला।
योगी आदित्यनाथ का 1999 से ही आजमगढ़ आना जाना था, इस दौरान एक पुजारी की हत्या हो गई थी, जिसे लेकर योगी ने बड़ा प्रदर्शन किया था। इसके बाद 2005 में मऊ दंगे के बाद हिंदू युवा वाहिनी ने आजमगढ़, मऊ और अन्य आसपास के जिलों में अपनी गतिविधियां बढ़ा दी थी।
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योगी आदित्यनाथ।(फाइल)
- फोटो : अमर उजाला।
अहमदाबाद धमाकों के एक महीने बाद गुजरात पुलिस ने आजमगढ़ से हमले में शामिल एक आरोपी अबू बशीर को पकड़ा। भगवा संगठनों ने हिंदू युवा वाहिनी के नेतृत्व में एलान किया कि वो आजमगढ़ में आतंकवाद के खिलाफ रैली निकालेंगे।
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योगी आदित्यनाथ।(फाइल)
- फोटो : अमर उजाला।
दिन तय हुआ, 7 सितंबर 2008, जगह- डीएवी कॉलेज का मैदान। योगी आदित्यनाथ उसमें मुख्य वक्ता थे। रैली की सुबह, गोरखनाथ मंदिर से करीब 40 वाहनों का काफिला निकला। उन्हें आजमगढ़ में विरोध की पहले से ही आशंका थी, इसलिए टीम योगी पहले से ही तैयार थी।
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योगी अदित्यनाथ।(फाइल)
- फोटो : अमर उजाला।
काफिले में योगी की लाल एसयूवी सातवें नंबर पर थी। आजमगढ़ के करीब पहुंचने तक काफिले में करीब 100 चार पहिया और सैकड़ों की संख्या में बाइक जुड़ चुकी थीं। एक पत्थर काफिले में मौजूद सातवीं गाड़ी यानि योगी के गाड़ी पर लगा।