‘वक्त से लड़कर जो नसीब बदल दे, इंसान वहीं है जो अपनी तकदीर बदल दे’, ये पंक्तियां भदोही के लाल और युवा क्रिकेटर यशस्वी जायसवाल पर बिलकुल सटीक बैठती हैं। उनके जीवन में जहां संघर्षों की दास्तान है, तो वहीं इसकी बदौलत हासिल की गईं उपलब्धियां आसमान की बुलंदियों को छूने की प्रेरणा भी देती हैं। यशस्वी जायसवाल, कोच ज्वाला सिंह की तीन वर्षीय बेटी कायरा सिंह के मुंडन संस्कार में शामिल होने के लिए शुक्रवार को गगहा विकास खंड स्थित करवल देवी मंदिर में सपरिवार पहुंचे थे।
यशस्वी जायसवाल: संघर्ष की आंच में तपा U-19 विश्वकप का हीरो, जिसने खुद लिखी अपनी किस्मत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यशस्वी मानते हैं कि इस मुकाम पर पहुंचने में कोच ज्वाला सिंह का अहम योगदान है। अपने संघर्षों के दौर को याद करते हुए यशस्वी ने बताया कि उनके क्रिकेटर बनने के सपने के सामने घर की माली हालत तनकर खड़ी थी। उन्होंने पेंट व्यवसायी पिता भूपेंद्र जायसवाल से मुंबई में रहने वाले अपने एक रिश्तेदार के घर भेजने की जिद की। वह मुंबई के वर्ली इलाके में रहने वाले रिश्तेदार के यहां पहुंच तो गए, पर वहां इतनी जगह नहीं थी कि वह रह पाते। फिर कोलबादेवी इलाके में स्थित एक डेयरी में उन्हें सोने की जगह इस शर्त पर मिली कि वह वहां काम भी करेंगे। यशस्वी ने हां तो बोल दिया, लेकिन ऐसा हो न सका। दिनभर क्रिकेट का अभ्यास करने के बाद जब शाम को लौटते तो थककर सो जाते। रहने का वह ठिकाना भी छूट गया।
11 साल की उम्र में यशस्वी ने नया ठिकाना मुंबई क्रिकेट की नर्सरी कहे जाने वाले आजाद मैदान को बनाया। यहां मुस्लिम यूनाइटेड क्लब में ग्राउंड्समैन के साथ टेंट में रहने लगे। यहां भी उनके ठहरने के लिए एक शर्त रखी गई थी। उन्हें अच्छा प्रदर्शन करके दिखाना होगा। यशस्वी दिनभर क्रिकेट खेलते और रात को यहीं सो जाते। यहां खाना बनाने का काम भी उन्हें ही दिया गया। उनके पिता कुछ पैसे भेज देते, लेकिन उससे काम नहीं चल पाता था। ऐसे में यशस्वी ने आजाद मैदान पर बॉल ढूंढ कर पैसे कमाए। अच्छा प्रदर्शन करने पर मैन ऑफ द मैच के रूप में भी बतौर इनाम कुछ रुपये मिलते। इसके अलावा आजाद मैदान में होने वाली रामलीला के दौरान उन्होंने गोलगप्पे भी बेचे।
ऐसे दिन बदले
जून-2018 में यशस्वी को श्रीलंका के खिलाफ अंडर-19 टीम में जगह मिली। पांचवें एकदिवसीय मैंच में उन्होंने न केवल मैच जिताऊ शतक लगाया, बल्कि टीम को सीरीज भी जीता दिया। यशस्वी ने विजय हजारे ट्राफी 2019 में मुंबई की तरफ से खेलते हुए एक दोहरे सहित तीन शतकों की मदद से पांच मैचों में 500 से अधिक रन बनाए। उन्होंने झारखंड के खिलाफ 149 गेंदों में अपना पहला दोहरा शतक लगाया और सबसे कम उम्र में ऐसा करने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाजी बन गए। इतना ही नहीं, वे विजय हजारे ट्रॉफी की एक पारी में सबसे ज्यादा 12 छक्के लगाने वाले खिलाड़ी भी बन गए।
आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स ने दो करोड़ में खरीदा
मुंबई की तरफ से खेलने वाले यशस्वी को आईपीएल 2020 में उनके बेस प्राइज से अधिक दो करोड़ और 40 लाख रुपये में खरीदकर राजस्थान रॉयल्स ने अपनी टीम में शामिल किया है।