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Exclusive: गोरखपुर के उपकरणों से आठ जोन में ट्रेनों को मिल रहा सिग्नल, जानिए कहां होता है प्रयोग

Mon, 01 Aug 2022 01:28 PM IST
vivek shukla राजन राय, गोरखपुर।
राजन राय, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 01 Aug 2022 01:28 PM IST
सार

गोरखपुर छावनी स्थित सिग्नल कारखाने में करीब दो हजार प्वाइंट्स मशीन व 30 हजार रिले बनाए जाते हैं। ट्रेनों को सिग्नल देने के लिए पटरियों के किनारे वायर बिछाए जाते हैं। इन वायर को प्वाइंट्स मशीन और रिले से जोड़ा जाता है। जिसके बाद ऑटोमेटिक सिग्नल काम करने लगता है।

 

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Trains getting signals in eight zones from Gorakhpur equipment
भारतीय रेल - फोटो : शटरस्टॉक्स

गोरखपुर सिग्नल कारखाना में बने उपकरणों से रेलवे के आठ जोन में ट्रेनों को सिग्नल मिलने लगा है। ये उपकरण प्वाइंट्स मशीन व रिले हैं, जिनके इस्तेमाल से ही ट्रेनों को रेड, यलो व ग्रीन सिग्नल मिलता है। देश के अन्य जोन से भी सिग्नल उपकरणों की मांग होने लगी है, जिसे देखते हुए निर्माण की क्षमता को बढ़ाया जा रहा है, इसके लिए 16 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।



गोरखपुर छावनी स्थित सिग्नल कारखाने में करीब दो हजार प्वाइंट्स मशीन व 30 हजार रिले बनाए जाते हैं। ट्रेनों को सिग्नल देने के लिए पटरियों के किनारे वायर बिछाए जाते हैं। इन वायर को प्वाइंट्स मशीन और रिले से जोड़ा जाता है। जिसके बाद ऑटोमेटिक सिग्नल काम करने लगता है।

 

Trains getting signals in eight zones from Gorakhpur equipment
भारतीय रेल - फोटो : Shutterstock

ये उपकरण ज्यादातर रेलवे जोन में नहीं बनते हैं। वहां इनकी आपूर्ति गोरखपुर कारखाने से की जा रही है। पूर्वोत्तर रेलवे को इन दोनों उपकरणों की आपूर्ति के लिए ज्यादा आर्डर मिल रहे हैं। इसे देखते हुए कारखाने की क्षमता को बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। जिसके बाद उपकरणों की सप्लाई मांग के अनुसार आठ रेलवे जोन के अलावा कई अन्य जोन में भी की जाएगी।  

कारखाना में निर्माण का ब्योरा

वर्ष    प्वाइंट्स मशीन रिले
2021-22  1,696   21,000
2022-23 (अब तक)  900  10,250

 


 

Trains getting signals in eight zones from Gorakhpur equipment
भारतीय रेल - फोटो : शटरस्टॉक्स

सात जोन में प्वाइंट्स मशीन की सप्लाई
पूर्वोत्तर रेलवे, पूर्वोत्तर मध्य रेलवे, पूर्व मध्य रेलवे, उत्तर पूर्व रेलवे, सेंट्रल रेलवे, पश्चिम मध्य रेलवे, उत्तर रेलवे।

पांच जोन में जाती है रिले
पूर्वोत्तर रेलवे, उत्तर मध्य रेलवे, पूर्व मध्य रेलवे, पश्चिम मध्य रेलवे, उत्तर रेलवे

1958 में कैंट में शिफ्ट हुआ था वर्कशॉप
पूर्वोत्तर रेलवे का सिग्नल वर्कशॉप 10 नवंबर 1944 में स्थापित हुआ था। उस समय 20 स्टॉफ तैनात थे। नवंबर 1958 में इसे गोरखपुर कैंट में शिफ्ट कर दिया गया। 120 स्टॉफ के साथ काम शुरू हुआ। मौजूद समय में इसका विस्तार कर दिया गया है।


 

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Trains getting signals in eight zones from Gorakhpur equipment
भारतीय रेल - फोटो : Istock

एक साल में होगा तीन शॉप का निर्माण
रेलवे सिग्नल कारखाना में रिले, 220 एमएम के विद्युत प्वाइंट मशीन और आधुनिक विद्युत लिफ्टिंग बैरियर गेट के निर्माण के लिए अलग-अलग शॉप बनाए जाएंगे। रेलवे बोर्ड ने 16 करोड़ रुपये स्वीकृत कर दिए हैं। यह तीनों परियोजनाएं जुलाई 2023 तक पूरी होंगी।

सिग्नल कारखाना को मिले हैं आईएसओ के चार प्रमाणपत्र
सिग्नल कारखाना, गोरखपुर छावनी को आईएसओ 9001:2015 (गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली), आईएसओ 14001:2015 (पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली), आईएसओ 45001:2018 (व्यावसायिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा प्रणाली) तथा आईएसओ 50001:2015 (ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली) प्रमाणपत्र प्राप्त हो चुका है। सभी प्रमाणपत्र सिग्नलिंग उपकरणों के निर्माण एवं आपूर्ति के लिए मिले हैं।

 

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Trains getting signals in eight zones from Gorakhpur equipment
भारतीय रेल। - फोटो : अमर उजाला।

पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने कहा कि सिग्नल कारखाना गोरखपुर में बनने वाली प्वाइंट्स मशीनें एवं रिले पूर्वोत्तर रेलवे के अतिरिक्त अन्य रेलवे जोन को भी भेजी जाती हैं। उत्पादकता बढ़ाने के लिए आधारभूत ढांचा विकसित किया जा रहा है। इसके कार्य स्वीकृत हैं, जिससे आने वाले समय में उत्पादन बढ़ाया जा सकेगा।

लिफ्टिंग बैरियर गेट के निर्माण का प्रस्ताव मंजूर
ट्रेनों में सफर और सुरक्षित होगा। पूर्वोत्तर रेलवे ने सिग्नल कारखाना में रेलवे के सुरक्षा में उपयोग आने वाले रिले के शॉप का निर्माण, 220 एमएम के विद्युत प्वाइंट मशीन के शॉप का निर्माण तथा आधुनिक विद्युत चालित विद्युत लिफ्टिंग बैरियर गेट के निर्माण के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।  इसके लिए रेलवे बोर्ड द्वारा लगभग 16 करोड़ रुपये की लागत की परियोजनाओं को स्वीकृत किया गया है। सीपीआरओ पंकज कुमार सिंह ने बताया कि यह तीनों परियोजनाएं अगले वर्ष जुलाई तक पूरी कर ली जाएंगी।
 

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