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गोरखपुर: कोरोना के दंश से परिवार के तीन सदस्यों की मौत, बेटी बोली- 'मेरी तो दुनिया ही खत्म हो गई'
Wed, 05 May 2021 12:23 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 05 May 2021 12:23 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
गोरखपुर जिले के जंगल चंवरी गांव में शेख टोला के एक ही परिवार में तीन दिनों में हुई तीन मौतों से पूरा इलाका दहल उठा। बिजली विभाग से सेवानिवृत्त इंजीनियर हीरालाल (73) के परिवार पर कोरोना ने ऐसा कहर बरपाया है कि पूरा परिवार ही टूटकर बिखर गया। पहले हीरालाल की मौत हुई। उनकी चिता की राख अभी ठंडी भी न हुई थी कि बहू ने दम तोड़ दिया। रोते-बिलखते घरवाले और कुछ रिश्तेदारों ने बहू का अंतिम संस्कार किया ही था कि उनके बड़े बेटे ने भी कोरोना से दम तोड़ दिया। तीन दिनों में तीन मौतों से यह परिवार ही नहीं, इलाके के लोग भी कांप जा रहे हैं। देर शाम हीरालाल की पत्नी सुनरदेई को भी निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
covid19
- फोटो : अमर उजाला।
सेवानिवृत्त इंजीनियर की शिक्षिका बेटी अर्चना ने जब सोशल मीडिया पर अपने परिवार पर आई विपत्ति को साझा कर मदद की गुहार लगाई तो जिसने भी सुना सहम गया। अर्चना और उनके पति अमित राज भी कोरोना संक्रमित हैं। इस घटना की जानकारी जब प्रशासनिक अमले को हुई तो अफसरों के हाथ-पांव फूल उठे। आनन-फानन स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची और बच्चों की एंटीजन किट से जांच की तो अन्य सदस्य निगेटिव पाए गए। अर्चना ने मोबाइल फोन पर अमर उजाला संवाददाता को बताया कि अभी तक घर को सैनिटाइज नहीं किया गया है। वह चुनाव ड्यूटी के बाद अपने पति के साथ पिता और मां की देखभाल करने आई थीं। वह दोनों भी संक्रमित हो गए हैं। इतना कहते ही वह रोने लगीं। रुंधे गले से बोलीं, मेरी तो दुनिया ही खत्म हो गई, मेरा मायका ही उजड़ गया।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
बड़े बेटे को सबसे पहले हुआ संक्रमण
जंगल चंवरी गांव के शेख टोला में सेवानिवृत्त इंजीनियर हीरालाल का परिवार रहता है। इनके तीन लड़कों में मनोज एवं प्रमोद का परिवार साथ रहता है। जबकि बड़े बेटे सुरेश चंद एलआईसी में अधिकारी हैं। वह दिव्यनगर के अपने मकान में सपरिवार रहते थे। करीब एक सप्ताह पूर्व सुरेश चंद को कोरोना के संक्रमण के कारण शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
जंगल चंवरी गांव के शेख टोला में सेवानिवृत्त इंजीनियर हीरालाल का परिवार रहता है। इनके तीन लड़कों में मनोज एवं प्रमोद का परिवार साथ रहता है। जबकि बड़े बेटे सुरेश चंद एलआईसी में अधिकारी हैं। वह दिव्यनगर के अपने मकान में सपरिवार रहते थे। करीब एक सप्ताह पूर्व सुरेश चंद को कोरोना के संक्रमण के कारण शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
वहीं जंगल चंवरी में घर पर रह रहे उनके पिता हीरालाल की तबीयत भी बिगड़ने लगी। उन्होंने कोरोना की जांच नहीं कराई थी। उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने लगी। दो मई को हीरालाल की मौत हो गई। तीन मई को उनकी बहू चंपा देवी (मनोज की पत्नी) की भी अचानक हालत खराब हो गई। परिवार के लोगों ने जिला अस्पताल में डॉक्टर को दिखाया और दवाएं लेकर वापस आ गए। संदेह है कि बहू भी कोरोना संक्रमित थी। रात में उसकी भी मौत हो गई। इसके बाद मंगलवार को अस्पताल में भर्ती चल रहे हैं सुरेश चंद ने भी दम तोड़ दिया।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
गौरीघाट पर हीरालाल व कड़जहां नाले पर बहू का अंतिम संस्कार
परिवारवालों ने दो मई को हीरालाल का अंतिम संस्कार गौरीघाट पर तो उनकी बहू चंपा देवी का दाह संस्कार तीन मई को रामनगर कड़जहां नाले के किनारे किया गया। मंगलवार की शाम को परिजन सुरेश का शव पैनेशिया हॉस्पिटल में लेने गए।
परिवारवालों ने दो मई को हीरालाल का अंतिम संस्कार गौरीघाट पर तो उनकी बहू चंपा देवी का दाह संस्कार तीन मई को रामनगर कड़जहां नाले के किनारे किया गया। मंगलवार की शाम को परिजन सुरेश का शव पैनेशिया हॉस्पिटल में लेने गए।