सूर्य ग्रहण के सूतल काल लगने के बाद शनिवार की रात से बंद शहर के मंदिरों के कपाट रविवार को ग्रहण खत्म होने के बाद खोल दिए गए। भक्तों ने घरों एवं पवित्र नदियों में स्नान करने के बाद विधि-विधान से पूजन-अर्चन के बाद दान-पुण्य किया एवं ग्रहण के दोष से मुक्ति के लिए भगवान से प्रार्थना की।
सूर्य ग्रहण के बाद खुले मंदिरों के कपाट, तस्वीरों में देखें ऐसे की गई पूजा-अर्चना
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वैसे तो ग्रहण की शुरुआत रविवार की सुबह 10 बजकर 32 मिनट से हुई लेकिन ग्रहण का सूतक काल शनिवार की रात दस बजकर पांच मिनट से लग गया था। सूतक लगने के बाद मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए थे। मंदिरों के दरवाजों पर ताला लगा दिया गया। जिससे कोई मंदिर में प्रवेश न कर सके। रविवार की सुबह सड़कों पर आम दिनों की तुलना में कम चहल-पहल दिखी। लोग ग्रहण के कारण घरों से बाहर नहीं निकले।
ग्रहण के दौरान बिना मूर्तियों को छुए पूजा-पाठ का सिलसिला घरों में चलता रहा। दो बजकर पांच मिनट पर जैसे ही सूर्य ग्रहण खत्म हुआ पुजारी एवं मंदिरों के कर्मचारियों ने मंदिरों में साफ-सफाई की। मूर्तियों को स्नान कराया गया और पूजा-अर्चना के लिए मंदिरों के खोल दिए गए हैं।
सूर्य ग्रहण के दौरान सभी मंदिरों के कपाट बंद रहे। ग्रहण समाप्त होने के बाद शहर के गोरखनाथ मंदिर, गोलघर काली मंदिर, बेतियाहाता हनुमान मंदिर, दाउदपुर काली मंदिर, शीतला माता मठिया जाफरा बाजार, विष्ण मंदिर, विंध्यवासिनी मंदिर मेडिकल कॉलेज रोड, कालीबाड़ी रेती चौक, पंचमुखी हनुमान मंदिर, हठ्ठी माता मंदिर बक्शीपुर, गीता वाटिका, जटाशंकर हनुमान मंदिर आदि मंदिर लोगों के लिए खोल दिए गए। मंदिर खुलने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की।
गीता वाटिका में हुआ ऑनलाइन भजन कीर्तन
सूर्य ग्रहण काल के समय गीता वाटिका स्थित नेह निकुंज में संकीर्तन एवं पदरत्नाकर गायन किया गया। इसमें गीता वाटिका के बाहर से भक्त जन गीता वाटिका के फेसबुक लाइव एकाउंट के माध्यम से जुड़कर संकीर्तन में सम्मिलित हुए।