संतकबीरनगर जिले में तैनात प्रशिक्षु एसडीएम श्याम बाबू की सफलता की दास्तां युवाओं के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं। लगन और मेहनत की बदौलत उन्होंने सिपाही से डिप्टी कलेक्टर तक का सफर तय किया। यानी जिन्हें वह पहले सलाम करते थे, अब उनकी सलामी लेते हैं।
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- फोटो : अमर उजाला।
बलिया के बैरिया तहसील के इब्राहिमाबाद गांव के एसडीएम श्याम बाबू के पिता धर्मनाथ की गांव में किराने की दुकान है। दो भाई और पांच बहनों के बीच श्याम बाबू चौथे नंबर के हैं। 2005 में वह सिपाही के पद पर भर्ती हुए।
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सिपाही पद से डिप्टी कलेक्टर तक की लंबी छलांग लगाए श्याम बाबू।
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नौकरी के साथ ही श्याम बाबू ने स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई की। वर्ष 2015 में वह पुलिस मुख्यालय प्रयागराज से संबंद्ध हुए। इसी वर्ष उन्होंने नेट की परीक्षा भी उत्तीर्ण की। बकौल श्याम बाबू जब सिपाही बने तो बड़े भाई उमेश एसएससी की तैयारी के लिए पटना चले गए।
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वर्ष 2011 में बड़े भाई को इनकम टैक्स विभाग में टीए टैक्स असिस्टेंट पद पर नौकरी मिल गई। बाद में बड़े भाई की प्रयागराज में तैनाती हो गई। पर जब उनकी तैनाती मऊ में थी, तब उन्होंने भी पीसीएस में शामिल होने का निर्णय लिया। परीक्षाएं भी दीं, लेकिन सफलता नहीं मिली।
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कोरोना संक्रमण के दौर में श्याम बाबू जिला कंट्रोल रूम में निभा रहे जिम्मेदारी।
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उधर, प्रयागराज में तैनाती के दौरान माहौल मिला तो सिपाही की नौकरी करने के साथ ही श्याम बाबू परीक्षा की तैयारी में जुट गए। वर्ष 2016 में डिप्टी कलेक्टर के पद पर उनका चयन हो गया। अक्तूबर 2019 में उन्हें संतकबीरनगर में प्रशिक्षु एसडीएम के पद पर तैनाती मिली। यहां कोरोना संक्रमण के दौरान उन्होंने जिला कंट्रोल रूम की जिम्मेदारी संभाली। दो दिन पूर्व उन्हें बीडीओ सांथा के पद पर तैनाती दी गई है।