आज हम आपको उत्तर प्रदेश पुलिस के एक ऐसे होनहार अफसर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनका बचपन बहुत ही संघर्षों के बीच गुजरा। बता दें कि इन दिनों वह मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग में पढ़ाई का मौका पाने वाले छात्रों के मार्गदर्शन का काम कर रहे हैं। वे विद्यार्थियों को इस लक्ष्य के साथ प्रशिक्षित कर रहे हैं कि आज वह जिस मुकाम पर हैं, यहां तक पहुंचने के लिए कई बाधाएं पार कीं है।
आगे की स्लाइड्स में पढ़िए इनकी संघर्ष की कहानी...
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पुलिस महानिरीक्षक राजेश डी मोडक।
- फोटो : अमर उजाला।
गोरखपुर परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक राजेश डी मोडक ने बचपन से ही चुनौतियों का सामना किया है। मूलरूप से नागपुर, महाराष्ट्र के रहने वाले राजेश डी मोडक जब पांच वर्ष के थे तब ही पिता का एक दुर्घटना में निधन हो गया। इसके बाद तो हर तरफ संघर्ष ही था, लेकिन उनकी मां डॉ इंदु रानी प्रसाद ने हौसला नहीं हारा।
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पुलिस महानिरीक्षक राजेश डी मोडक।(सेंटर में)
- फोटो : अमर उजाला
मां ने मृतक आश्रित में चतुर्थ श्रेणी की नौकरी स्वीकार नहीं की। स्नातक की पढ़ाई पूरी की और फिर क्लर्क बनीं। यह वह समय था, जब राजेश और उनके बड़े भाई अभीम मोडक ने तालीम शुरू की थी। सुख-सुविधाओं में कटौती कर मां ने पढ़ाई पूरी कराई।
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पुलिस महानिरीक्षक राजेश डी मोडक।(फाइल)
- फोटो : अमर उजाला।
बकौल राजेश, मां ने पढ़ाई के प्रति हम लोगों में चिंगारी पैदा की। पढ़ाई के दौरान मैंने, बड़े भाई से पूछा कि टाइप करना सीख लूं, तो उन्होंने कहा कि कुछ ऐसा बनो कि टाइप करने वाला तुम्हारे पास हो। कुएं के मेंढक मत बनो, बाहर की दुनिया देखो। तुम पढ़ने में सबसे तेज हो।
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पुलिस महानिरीक्षक राजेश डी मोडक।(फाइल)
- फोटो : अमर उजाला।
राजेश ने बताया कि उनके बड़े भाई की प्रेरणा से ही आज इस मुकाम पर हूं। इसलिए विद्यार्थियों को सलाह देता हूं और कहता हूं कि कुछ ऐसा करो कि लोगों में यह विश्वास पैदा हो जाए कि तुम में भी कुछ है।