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Gorakhpur News: सोरायसिस में त्वचा ही नहीं दिल, जोड़ों और मानसिक सेहत पर भी पड़ता है असर
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गोरखपुर। त्वचा पर लाल चकत्ते और पपड़ी जमने की समस्या को अक्सर लोग सिर्फ त्वचा का रोग समझते हैं लेकिन सोरायसिस का असर शरीर के दूसरे अंगों और मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। इससे मधुमेह, हृदय संबंधी जोखिम, जोड़ों में दर्द और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं भी जुड़ सकती हैं। इसलिए इसका इलाज केवल त्वचा के लक्षणों तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है।
एम्स में विश्व सोरायसिस दिवस पर आयोजित शैक्षणिक कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने यह बात कही। एम्स के त्वचा रोग विभाग की ओर से बृहस्पतिवार को आयोजित कार्यक्रम में चिकित्सकों ने बताया कि सोरायसिस प्रतिरक्षा प्रणाली से जुड़ी दीर्घकालिक सूजनकारी बीमारी है। इसमें मरीज को लंबे समय तक उपचार और नियमित निगरानी की जरूरत हो सकती है। बीमारी के प्रति जागरूकता की कमी और सामाजिक भेदभाव भी मरीजों की परेशानी बढ़ाते हैं।
कार्यक्रम का शुभारंभ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय भारती ने किया। त्वचा रोग विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. सुनील कुमार गुप्ता ने कहा कि मरीज के संपूर्ण स्वास्थ्य का मूल्यांकन और समय-समय पर जांच जरूरी है। उपचार में त्वचा रोग विशेषज्ञों के साथ अन्य विभागों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। शैक्षणिक सत्र में विशेषज्ञों ने बीमारी के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के डॉ. देबादित्य दास ने सोरायसिस और मेटाबॉलिक सिंड्रोम के संबंध बताए। सामान्य चिकित्सा विभाग के डॉ. बृजेश कुमार चौधरी ने सोरायटिक आर्थराइटिस, जबकि मनोचिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज पृथ्वीराज एम. ने इसके मनोवैज्ञानिक प्रभावों पर जानकारी दी।
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एम्स में विश्व सोरायसिस दिवस पर आयोजित शैक्षणिक कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने यह बात कही। एम्स के त्वचा रोग विभाग की ओर से बृहस्पतिवार को आयोजित कार्यक्रम में चिकित्सकों ने बताया कि सोरायसिस प्रतिरक्षा प्रणाली से जुड़ी दीर्घकालिक सूजनकारी बीमारी है। इसमें मरीज को लंबे समय तक उपचार और नियमित निगरानी की जरूरत हो सकती है। बीमारी के प्रति जागरूकता की कमी और सामाजिक भेदभाव भी मरीजों की परेशानी बढ़ाते हैं।
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कार्यक्रम का शुभारंभ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय भारती ने किया। त्वचा रोग विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. सुनील कुमार गुप्ता ने कहा कि मरीज के संपूर्ण स्वास्थ्य का मूल्यांकन और समय-समय पर जांच जरूरी है। उपचार में त्वचा रोग विशेषज्ञों के साथ अन्य विभागों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। शैक्षणिक सत्र में विशेषज्ञों ने बीमारी के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के डॉ. देबादित्य दास ने सोरायसिस और मेटाबॉलिक सिंड्रोम के संबंध बताए। सामान्य चिकित्सा विभाग के डॉ. बृजेश कुमार चौधरी ने सोरायटिक आर्थराइटिस, जबकि मनोचिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज पृथ्वीराज एम. ने इसके मनोवैज्ञानिक प्रभावों पर जानकारी दी।
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