उत्तर प्रदेश के बस्ती जिला मुख्यालय से करीब 40 किमी मीटर दूर परसरामपुर ब्लॉक अंतर्गत श्रृंगी नारी मंदिर में आषाढ़ माह के अंतिम मंगलवार को भव्य मेला लगता है। हजारों की संख्या में श्रद्धालु राजा दशरथ की पुत्री व श्रृंगी ऋषि की पत्नी मां शांता द्वारा स्थापित देवी मंदिर में शीश झुकाकर आशीर्वाद लेते हैं।
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Sringi nari temple
- फोटो : अमर उजाला।
यहां हर मंगलवार को बड़ी संख्या में लोग मुंडन, उपनयन व अन्य धार्मिक संस्कार कराते हैं। इसी दिन भक्त देवी मां के चरणों में हलुआ, पूड़ी का भोग चढ़ाते हैं। नव विवाहित जोड़े मां शांता देवी के चरणों में मौर चढ़ाकर मंगल जीवन की कामना करते हैं। मान्यता है कि जो श्रद्धा से मां के दरबार में उपस्थित हुआ, उसकी सभी मुरादें पूरी हुईं।
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पौराणिक मान्यता
मान्यता है कि पौराणिक स्थल श्रृंगीनारी में मां शांता ने देवी का एक भव्य मंदिर स्थापित किया। मंदिर के प्रमाण त्रेता युग से मिलते हैं। ये लाखों भक्तों के श्रद्धा व विश्वास का प्रतीक है।
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त्रेता युग में मनोरमा नदी के तट पर राजा दशरथ ने मखौड़ा में पुत्रेष्ठ यज्ञ कराया। जो आषाढ़ माह के अंतिम मंगलवार को समाप्त हुआ था। यज्ञ के प्रधान आचार्य श्रृंगी ऋषि की पत्नी शांता देवी इसी स्थान पर 45 दिनों तक पिंडी स्थापित कर शक्ति की आराधना करती रहीं। इसी जगह पर अब मंदिर स्थापित है।
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हालांकि पूरे देश में कोरोना वायरस के कारण अभी मंदिर को भक्तों के लिए बंद किया गया है। आम दिनों में यहां हजारों की संख्या लोग श्रद्धापूर्वक आते हैं।