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आजादी के पहले भारतीय रेल का टिकट हो या पहली सवारी ट्रेन, इनके पास मौजूद हैं सभी यादें

Mon, 01 Jun 2020 09:12 AM IST
vivek shukla रोहित सिंह, गोरखपुर।
रोहित सिंह, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 01 Jun 2020 09:12 AM IST
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Special story of Sandeep Chaurasia collecting railway tickets in Gorakhpur
railway tickets - फोटो : अमर उजाला।

आजादी के पहले से रेलवे के डाक टिकटों का संग्रह देखना है तो संदीप चौरसिया के डाक टिकटों का संग्रह पर्याप्त होंगे। कक्षा पांच से रेलवे डाक टिकटों के संग्रह का चस्का ऐसा लगा कि अब तक जो भी टिकट छपा, सब उनके पास हैं।

Special story of Sandeep Chaurasia collecting railway tickets in Gorakhpur
railway tickets - फोटो : अमर उजाला।

संदीप वर्तमान में रेलवे अस्पताल में कार्यरत हैं लेकिन अभी भी टिकटों के प्रति उनका लगाव कम नहीं हुआ है। देश विदेश में फिलेटली के आयोजनों में भी वो अपने डाक टिकटों के संग्रह के साथ जाते हैं। संदीप ने बताया कि उनको यह प्रेरणा उनके दोस्त के भाई से मिली।

Special story of Sandeep Chaurasia collecting railway tickets in Gorakhpur
railway tickets - फोटो : अमर उजाला।

इसके बाद उन्होंने अपने घर के अलावा आसपास के लोगों के पास आने वाली चिट्ठी पत्रों के भी टिकट एकत्र करना शुरू कर दिए। रेलवे में नौकरी लग जाने के बाद उनका शौक जुनून में बदल गया। संदीप ने बताया कि उनके पास आजादी के पहले 1937 में जारी भारतीय रेलवे का पहला टिकट भी है।

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Special story of Sandeep Chaurasia collecting railway tickets in Gorakhpur
railway tickets - फोटो : अमर उजाला।

इसपर जार्ज षष्टम की तस्वीर है। इसके अलावा संग्रह में पहले स्टीम इंजन जिसे रिचर्ड ट्रेवेथिक ने सन् 1804 में बनाया था, उसका टिकट भी मौजूद है। मुंबई के बोरिबंदर व थाणे के बीच चली पहली रेलगाड़ी, 25 मार्च 1825 को स्वेनसिया और मुंबेल्स के बीच चलाई गई पहली सवारी ट्रेन और 27 सिंतबर 1825 को भाप इंजन के प्रयोग पर जारी रेलवे डाक टिकट भी उनके संग्रह की शोभा बढ़ा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब जुनून विश्व रिकार्ड बनाने का है। इसके लिए भारतीय व विदेशी रेल टिकटों का संग्रह कर दावेदारी की इच्छा है।

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Special story of Sandeep Chaurasia collecting railway tickets in Gorakhpur
railway tickets - फोटो : अमर उजाला।

चाइना में हो चुके हैं सम्मानित
संदीप ने बताया कि उन्हें चीन के मकाऊ में आयोजित अंतरराष्ट्रीय डाक टिकट की प्रदर्शनी में बुलाया गया था। वहां उनके डाक संग्रह के लिए उन्हें रजत पदक से सम्मानित किया गया।

पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन के दस्तावेज भी हैं संग्रह में
गोरखपुर से चली पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन मौर्य एक्सप्रेस से संबंधित सभी रिकार्ड भी संदीप के संग्रह में हैं। रेल के लिफाफे पर रेल मंत्री, राज्य मंत्री, ट्रेन के गार्ड और ड्राइवर दोनों के हस्ताक्षर भी हैं।
 

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