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दुनिया का सबसे अनोखा है ये 'लीला चित्र मंदिर', यहां दीवार पर लिखी है संपूर्ण गीता

Sun, 29 Nov 2020 06:58 PM IST
vivek shukla अविनाश श्रीवास्तव, गोरखपुर।
अविनाश श्रीवास्तव, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 29 Nov 2020 06:58 PM IST
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Special story of Geeta Press leela chitra Mandir Gorakhpur
गीता प्रेस - फोटो : अमर उजाला।

यदि आप गीता प्रेस जा रहे हैं तो यहां का लीला चित्र मंदिर घूमना नहीं भूलें। यह अपने आप में अनोखा है। ऐसा चित्र मंदिर पूरी दुनिया में कहीं नहीं है। यहां श्रीमद्भागवत गीता के 18 अध्याय दीवारों पर लिखे गए हैं। साथ ही सैकड़ों की संख्या में देवी-देवताओं के चित्र एक ही छत के नीचे मौजूद हैं जो और कहीं नहीं हैं।

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गीता प्रेस स्थित लीला चित्र मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।

गीता प्रेस के लीला चित्र मंदिर में बीके मित्रा, जगन्नाथ और भगवानदास द्वारा बनाए गए सैकड़ों चित्र सुरक्षित और संरक्षित हैं। लीला चित्र मंदिर की दीवारों पर श्रीमद्भागवत गीता के 18 अध्याय संगमरमर पर लिखे हुए हैं। साथ ही देवी-देवताओं के 700 से अधिक चित्र हैं। इनकी सुंदरता देखकर मन प्रफुल्लित हो उठता है।

 

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गोरखपुर की पहचान गीता प्रेस। - फोटो : अमर उजाला।

लीला चित्र मंदिर में पूर्व की तरफ भगवान श्री कृष्ण के चित्र हैं। पश्चिम की तरफ श्रीराम के लीला-चित्र हैं। दक्षिण की तरफ दशावतार तथा इससे जुड़े चित्र हैं, तो उत्तर की ओर नवदुर्गा समेत अनेक देवियों के चित्र हैं। इन चित्रों में से अधिकतर बीके मित्रा, जगन्नाथ और भगवानदास ने बनाए हैं। इसके अलावा वहां 600 से अधिक पेंटिंग्स भी हैं। इनमें मेवाड़ी शैली में भगवान कृष्ण की लीला दिखाई गई है। ये मेवाड़ से लाकर किसी ने भाईजी को भेंट की थीं।

 

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गीता प्रेस। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।

इसी तरह जयपुर, मुगल, ओरिएंटल आर्ट की भी पेंटिंग्स हैं। यहां कई चित्र ऐसे हैं जो 200 सालों से भी ज्यादा पुरानी है। वहीं 17वीं शताब्दी की गोविंद गद्दी का चित्र यहां का विशेष आकर्षण है। इसके अलावा यहां दुनिया की 22 भाषाओं में मुद्रित गीता के 1167 विभिन्न संस्करणों का संकलन हैं। इनमें कई हस्तलिखित गीता की सचित्र पुस्तकें शामिल हैं।

 

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रामानंद सागर की रामायण का एक दृश्य - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

रामायण बनाने से पहले गीता प्रेस आए थे रामानंद सागर
रामायण बनाने से पहले रामानंद सागर चार दिनों के लिए गीता प्रेस आए थे। गीता प्रेस में देवी-देवताओं के सैकड़ों चित्र रखे हुए हैं। रामानंद सागर ने बारीकी से उन चित्रों को देखा। चित्रों में देवी-देवताओं के वस्त्र, उनके रंग और आभूषणों के आधार पर ही उन्होंने अपने धारावाहिक के पात्रों राम, लक्ष्मण, सीता, कौशल्या, हनुमान, सुग्रीव आदि के वस्त्र, उनके रंग और आभूषण का चुनाव किया।

 

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