फ्रांस के टूलूज शहर का फ्रांसीसी परिवार इन दिनों भारतीय संस्कृति में धीरे-धीरे ढलता जा रहा है। चाहे भोजपुरी में बोलना हो या फिर गांव के लोगों के साथ घुलमिलकर बातें करना, विदेशी परिवार को अच्छा लगने लगा है। अब तो विदेशी मेहमान मंदिर के बरामदे में जमीन पर बैठकर हर रोज भोजन करता है। विदेशी मेहमान की बातें, व्यवहार लोगों के आकर्षण का केंद्र है।
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गांव के लोग इनके मुंह से भोजपुरी सुनकर खुश हो जाते हैं।
- फोटो : अमर उजाला।
भोजपुरी में इस विदेशी परिवार की टूटी-फूटी भाषा सुनकर गांव के लोग हंसने के साथ ही फक्र भी करते हैं। लॉकडाउन के बाद से ही यह फ्रांसीसी परिवार कोल्हुई थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत कोल्हुआ उर्फ सिहोंरवा शिव मंदिर में रह रहा है।
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टॉम गांव के बच्चों के साथ दिनभर साईकिल से घूमता है।
- फोटो : अमर उजाला।
पैट्रीस पैलेरस, उनकी पत्नी वर्गिनी पैलेरस, उनकी दो बेटियां ओफिली पैलेरस व लोला पैलेरस तथा बेटा टॉम पैलेरस हर रोज मंदिर में जमीन पर बैठकर भोजन करते हैं। आज के आधुनिक युग में विदेशी मेहमानों की यह गतिविधि लोगों को बरबस अपनी ओर आकर्षित करती है। मंदिर के पुजारी बाबा हरिदास के भंडारे में शुद्ध शकाहारी भोजन इन सभी लोग बेहतर ढंग से परोसा जाता है।
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गांव में घूमती लोला पैलेरस।
- फोटो : अमर उजाला।
बाबा के मुताबिक फ्रांसीसी परिवार को शाकाहारी भोजन अच्छा लगता है। दाल, चावल, सब्जी, रोटी, दूध प्रमुख रूप से भोजन में शामिल रहता है। बाबा उदराज बताते हैं कि लंबे समय से रहने के कारण विदेशी मेहमानों को भोजपुरी भी बोलने के साथ समझ में आने लगा है। जिससे वह गांव के लोगों से घुल मिलकर बातें करते हैं।
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मंदिर के प्रांगण में रहता है फांसीसी परिवार।
- फोटो : अमर उजाला।
ग्राम प्रधान पुत्र योगेंद्र सहानी कहते हैं कि फ्रांसीसी परिवार को अच्छी सुविधा मिल रही है, जिससे उन्हें होटल या गेस्ट हाउस पसंद नहीं आ रहा है। गवई संस्कृति के बीच लोगों के साथ रहना उन्हें अच्छा लगा रहा है। गांव के लोग भी अतिथि देवो भवः की परंपरा का अनुशरण करते हुए उनकी हर संभव मदद करते हैं।