गोरखपुर शहर के दंत चिकित्सक डॉ. राकेश मिश्रा के दिन की शुरूआत पौधों के सानिध्य में होती है। सुबह का दो घंटा जेमिनी गार्डेनिया के दसवें फ्लोर स्थित आवास की बालकनी में गुजरता है। वैसे तो आवास में भी जगह-जगह गमले लगाए गए हैं, लेकिन बालकनी पूरी तरह हरियाली के हवाले है।
डॉक्टर ने की है प्राणवायु देने वालों से दोस्ती, इस दपंती ने बेटे के शौक को बनाया जिंदगी का हिस्सा
डॉ. राकेश मिश्रा ने बताया कि इस काम में पत्नी दंत चिकित्सक डॉ. प्रेरणा त्रिपाठी का भी साथ मिलता है। उन्होंने बताया कि एक स्वस्थ पेड़ दिन में 230 लीटर ऑक्सीजन देता है, जो सात लोगों के लिए प्राणवायु का काम करती है। इस बेशकीमती हवा की अहमियत सभी को समझनी चाहिए। पेड़ के आसपास गंदगी फैलाने या कचरा जलाने से ऑक्सीजन का उत्सर्जन कम होता है। अगर कोई ऐसा करे तो रोकने की जरूरत है।
लॉकडाउन में बागवानी को दिया पूरा समय
डॉ. राकेश मिश्रा ने बताया कि वह घर की 100-100 स्क्वायर फीट की दोनों बालकनी का इस्तेमाल गार्डेनिंग का शौक पूरा करने के लिए करते हैं। घर के भीतर भी करीब 200 गमले हैं। बताया कि लॉकडाउन के दौरान पूरा समय बागवानी को दिया।
बेटे के शौक को जिंदगी का हिस्सा बनाया
दाउदपुर में रहने वाले अधिवक्ता रामचंद्र सिंह की पत्नी बिंदु सिंह वैसे तो 1998 से अपने आवास में बागवानी कर रही हैं, लेकिन घर में बागवानी का सबसे ज्यादा शौक उनके बड़े बेटे चंद्रशेखर सिंह को था। वर्ष 2002 में एक हादसे में उनकी जान चली गई। इसके बाद से बिंदु सिंह ने बड़े बेटे के शौक को दिल से लगाए रखा है।
वह कहती हैं कि पौधों की देखभाल से मानसिक शांति मिलती है। उनके घर में 200 गमले हैं, जिनमें गेंदा, गुलाब, गुड़हल, सर्पगंधा, मनी प्लांट, चाइना पॉम, तुलसी, गिलोय की तमाम प्रजातियों का संग्रह है। उन्होंने अपने घर के तीनों तल पर आगे के खाली पड़े हिस्से को टेरेस गार्डन के रूप में तैयार किया है। बागवानी का शौक पूरा करने में उनकी बेटी प्रियंका सिंह, प्रीति सिंह और बेटा अभिषेक सिंह भी हाथ बंटाते हैं।