उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर के बेतियाहाता की अनुपमा सिंह के घर की हरियाली उनके 20 साल के लगन की देन है। आज घर का हर कोना उनके शौक की कहानी बयां करता है। लंबे अर्से से उनकी दिनचर्या का दो घंटा घर के पेड़ -पौधों को समर्पित रहता है। इसमें बाल रोग विशेषज्ञ पति डॉ. दुष्यंत सिंह का भी साथ मिलता है।
तस्वीरें: 20 साल के लगन की देन है अनुपमा की 'अनुपम' बगिया, इनके घरों में भी हरियाली ने डाला डेरा
इसी का नतीजा अनुपमा सिंह के घर में मौजूद एक हजार स्क्वायर फीट का लहलहाता हुआ गार्डन है। इसके अलावा करीब 200 गमले भी घर की खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं। उनके गार्डन में एक तरफ आम, अमरूद, चीकू, शहतूत, आंवला, नींबू, करोंदा, अनार, शरीफा आदि हैं तो सजावटी पौधों के साथ औषधीय गुणों से युक्त पुदीना, तुलसी, गिलोय की भी मौजूदगी है। मौसमी सब्जियों के लिए उन्होंने किचन गार्डन में तैयार किया है।
दादा से विरासत में मिला बागवानी का शौक
दंत चिकित्सक डॉ. मिहिर कुमार को बागवानी का शौक उनके दादाजी मुनेश्वर प्रसाद से विरासत में मिला। फिर मन ऐसा रमा कि घर में पांच हजार स्क्वायर फीट का गार्डन तैयार कर डाला। इसके अलावा करीब 500 गमले भी डॉ. मिहिर की बगिया की शोभा बढ़ाते हैं।
बैंक रोड स्थित डॉ. मिहिर के आवास की बगिया में रुद्राक्ष ,गंधराज, गिलोय ,आरकेरिया, सतावर, अपराजिता, तेजपत्ता ,शरीफा , केला ,कदम रजनीगंधा, आंवला ,कनेर, अश्वगंधा, मदार आदि के पौधे हैं। बागवानी के लिए जैविक खाद वह घर में ही तैयार करते हैं। डॉ. मिहिर ने बताया कि उनकी पत्नी और मनीषा संगीत महाविद्यालय की असिसटेंट डायरेक्टर निक्की रानी भी बगिया की देखरेख में हाथ बटाती हैं।
गमलों में पूरा कर रहीं बागवानी का शौक
बशारतपुर के जेमिनी रेजिडेंसी में रहने वाली पूनम सिंह का हरियाली से लगाव ऐसा है की अपने तीसरे तल स्थित फ्लैट की दोनों बालकनी को पेड़-पौधों को समर्पित कर दिया है। रेलवे में चीफ रिजर्वेशन सुपरवाइजर पूनम ने यहां गमलों में सजावटी, सुगंधित फूलों के साथ औषधीय पौधे भी लगाए हैं। रेलवे में एसीएम के पद पर कार्यरत पति जितेंद्र कुमार सिंह भी इस काम में हाथ बटाते हैं पूनम ने बताया कि सिविल लाइंस के पैतृक आवास में बड़ा गार्डन था। यहीं बागवानी का शौक परवान चढ़ा। पौधों के चयन से लेकर खाद, निराई गुड़ाई तक का पूरा काम पूनम अपनी देखरेख में कराती थीं।