गोरखपुर में इस बदमाश से खौफ खा रही थी पुलिस, वर्तमान एडीजी कानपुर ने ऐसे निकाला था इनका डर
बात 14 अक्तूबर 2018 की रात की है। हिस्ट्रीशीटर मिथुन पासवान के घर दावत हो रही थी और वह कई मामलों में वांछित था। उसकी तलाश में पुलिस टीम उसके घर पहुंच गई थी लेकिन इसकी भनक बदमाशों को पहले ही लग गई थी। फिर क्या दबिश देने गई पुलिस टीम पर बदमाशों ने हमला कर दिया।
इस हमले में दो सिपाही समेत एक दरोगा घायल हो गए। बदमाशों ने सिपाही वंश नारायण गौड़ को गोली भी मार दी थी। जबकि रॉड और लाठी-डंडों से दरोगा घनश्याम वर्मा और सिपाही शैलेंद्र सिंह की पिटाई कर दी थी। गंभीर हालत में घायल पुलिस कर्मियों को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। मिथुन पासवान 13 संगीन मुकदमों में वांछित था। इस दौरान वह फरार हो गया था। इससे पहले साल 2017 में खोराबार पुलिस के साथ हुए मुठभेड़ में भी वह बच निकला था।
पुलिस टीम पर हमले के बाद पुलिस वालों का मनोबल गिर गया था। पुलिस बदमाशों से लोहा लेने में कतरा रही थी, इसी दौरान आईजी के पद पर जयनारायण सिंह ने चार्ज संभाला (वर्तमान में एडीजी कानपुर) था। जयनारायण सिंह ने आते ही सबसे पहला टारगेट मिथुन को ही बनाया और एक विशेष टीम गठित कर मिथुन की तलाश में लगा दी गई।
25 नवंबर 2018 की तड़के सुबह पुलिस और मिथुन उसके साथियों से मुठभेड़ हो गई। गुलरिहया इलाके के बनगाई जंगल के पास पुलिस मुठभेड़ में मिथुन और उसके साथी धीरू पासवान को पैर में गोली मारी गई थी। तत्कालीन आईजी ने दोनों को दबोचकर पुलिस कर्मियों से बदला ले लिया था।