खगोलीय घटनाओं में रूचि रखने वाले लोगों के लिए बुधवार का दिन बेहद खास रहा। जब हजारों वर्षो के बाद धूमकेतु (कॉमेट) स्वान एक करोड़ 10 लाख मील लंबी पूंछ के साथ सूर्य के सबसे नजदीक से हरे और नीले रंग की आतिशबाजी करते गुजरा। सुबह सूर्योदय के वक्त इसे धरती से टेलिस्कोप या ऑनलाइन देखा गया।
1 करोड़ 10 लाख मील लंबी पूंछ से हरे और नीले रंग की आतिशबाजी करते गुजरा धूमकेतु, देखें तस्वीरें
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला के खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि बुधवार की सुबह ये सूर्य के करीब से गुजरा है। 11, 597 साल में एक बार ऐसी अनोखी खगोलीय घटना का दीदार होता है।
यह धूमकेतु दक्षिण से उत्तर की ओर तेजी से बढ़ रहा था। इस वजह से इसकी रोशनी में भी तेजी से इजाफा हुआ। सूर्य के ताप और उससे बचकर निकल जाने की वजह से ये ज्यादा चमकदार नजर आया।
धूमकेतु या कॉमेट सौरमण्डलीय में पाए जाने वाले ऐसे तारे होते हैं, जो मूल रूप से पत्थर, धूल, बर्फ और गैस के बने हुए छोटे-छोटे टुकड़े होते हैं। यह ग्रहों के समान ही सौरमंडल में सूर्य की परिक्रमा करते हैं।
छोटे पथ वाले धूमकेतु सूर्य की परिक्रमा एक अण्डाकार पथ में लगभग 6 से 200 साल में एक बार पूरी करते हैं। कुछ धूमकेतु तारों का पथ वलयाकार होता है और वो अपने पूरे जीवनकाल में मात्र एक बार ही दिखाई देते हैं। लंबे पथ वाले धूमकेतु अक्सर एक परिक्रमा करने में हजारों वर्ष लगाते हैं।
बर्फ, कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन से होता है तैयार
अधिकतर धूमकेतु बर्फ, कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, अमोनिया तथा अन्य पदार्थ जैसे सिलिकेट और कार्बनिक मिश्रण के बने होते हैं। इन्हें सामान्य भाषा में पुच्छल तारा भी कहा जाता है क्योंकि इनके पीछे उक्त तत्वों की लंबी पूंछ बनी हुई होती है जो सूर्य के प्रकाश से चमकती रहती है। धूमकेतू का नजर आना अपने आप में दुर्लभ घटना है क्योंकि ये कई बरसों में एक बार नजर आते हैं।