भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में श्रद्धालु भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाते हैं, लेकिन इस बार तिथि को लेकर श्रद्धालुओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि इस बार अष्टमी तिथि में रोहिणी नक्षत्र संयोग नहीं बन रहा है। ज्योतिषियों के मुताबिक, गृहस्थ लोग 11 अगस्त को जबकि वैष्णव (साधु-संत) 12 अगस्त को जन्माष्टमी का पर्व मनाएंगे।
Janmashtami 2020: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तिथि को लेकर असमंजस में हैं श्रद्धालु, नहीं बन रहा है ये खास संयोग
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इस तरह करें व्रत-पूजन
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन प्रात: काल स्नानादि से निवृत्त होने के बाद पूजन-अर्चन कर व्रत का संकल्प करें। भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र स्थापित कर झांकी सजाएं। इसके बाद विधि-विधान से पूजन करें। पूजन में देवकी, वासुदेव, बलदेव, नंद, यशोदा और लक्ष्मी इन सबका नाम क्रमश: लेना चाहिए। मध्य रात्रि 12 बजे जन्मोत्सव मनाएं। अंत में प्रसाद वितरण कर भजन-कीर्तन करते हुए रात्रि जागरण करें। ऐसी मान्यता है कि जन्माष्टमी का व्रत करने से व्यक्ति को बाल कृष्ण जैसी संतान प्राप्त होती है।
11 अगस्त को गृहस्थ लोग रखें व्रत
ज्योतिषाचार्य पंडित बृजेश पांडेय के अनुसार, गृहस्थों को उस दिन व्रत रखना चाहिए जिस रात को अष्टमी तिथि लग रही है। पंचांग के अनुसार, 11 अगस्त दिन मंगलवार को गृहस्थ आश्रम के लोगों को जन्माष्टमी का पर्व मनाना सही रहेगा, क्योंकि 11 की रात को अष्टमी है। गृहस्थ लोग रात में चंद्रमा को अर्घ्य दें, दान और जागरण कीर्तन करें। 12 अगस्त को व्रत का पारण करें और कृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाएं। वहीं वैष्णव लोग 12 को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाएं।
नहीं बन रहा रोहिणी और अष्टमी का संयोग
ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन के अनुसार भगवान कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। कई बार ऐसा होता है ये दोनों संयोग एक साथ नहीं बन पाते। इस बार भी कृष्ण जन्म की तिथि और नक्षत्र एक साथ नहीं मिल रहे हैं।
11 अगस्त को सुबह नौ बजकर छह मिनट के बाद अष्टमी तिथि का आरंभ हो जाएगा, जो 12 अगस्त को 11 बजकर 17 मिनट तक रहेगी। वहीं रोहिणी नक्षत्र का आरंभ 13 अगस्त को सुबह तीन बजकर 27 मिनट से पांच बजकर 22 मिनट तक रहेगा।