थाना कोई भी हो, वहां पर लॉकअप का मतलब ही होता है ताला। क्योंकि उसमें बदमाशों को पकड़ने के बाद रखा जाता है और फिर कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद कोर्ट में पेश कर जेल भेजा जाता है। लेकिन इस वैज्ञानिक युग में भी गोरखपुर जिले का एक थाना ऐसा है जहां छोटी सी चूक बड़ी घटना को दावत देता है। यही वजह है कि लॉकअप वर्षों से खाली है और काम चलाने के लिए थानेदार के ऑफिस को ही लॉकअप बना दिया गया है।
14 साल से इस लॉकअप में नहीं बंद हुआ कोई भी अपराधी, खतरनाक है इसकी कहानी
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11 साल पहले शाहपुर क्षेत्र के सुनील साहनी को लॉकअप में बंद किया गया था। अगली सुबह उसका शव कुसम्ही जंगल में मिला था। तब सुनील के परिजनों ने थाने में जमकर बवाल किया। गुस्साई भीड़ ने असुरन पुलिस चौकी तक फूंक दी थी।
मृतक के परिजनों ने पुलिस पर आरोप लगाया था कि चोरी के आरोप में पकड़े गए सुनील को पुलिस ने बेरहमी से पीटा, जिससे उसकी मौत हो गई। फिर शव को कुसुम्ही जंगल में फेंक दिया। मामले में तत्कालीन थानेदार श्रीप्रकाश गुप्ता सहित कई निलंबित किए गए। इसके बाद से लॉकअप को अशुभ मान लिया गया।
कुछ थानेदारों ने इक्का-दुक्का अभियुक्तों को बंद किया। संयोग से उनमें से किसी ने हाथ की नस काट ली तो किसी ने गर्दन पर हमला कर खुदकुशी करने की कोशिश की। ऐसी पांच घटनाओं के बाद जो भी थानेदार आया और इस लॉकअप का किस्सा सुना तो सभी ने एक सुर में कहा, लॉकअप में किसी को बंद नहीं किया जाएगा।
शाहपुर थाना 1980 में बना तब से 2006 तक इसके लॉकअप में नौ लोगों की मौत हो चुकी है। थाने के निर्माण में छत की शटरिंग गिरने के दौरान कई मजदूर घायल भी हो गए थे। इसमें तीन की मौत हो गई थी। थाना बनकर तैयार हो गया पर मौतों का सिलसिला जारी रहा।
इसके अलावा 31 जनवरी 2001 को राजेश शर्मा नाम के एक व्यक्ति की पिटाई के बाद लॉकअप में मौत हो गई थी। तत्कालीन थानेदार संजय सिंह के साथ ही तीन सिपाहियों पर हत्या का केस दर्ज हुआ था। शाहपुर थाने के लॉकअप में वर्ष 2006 के बाद से किसी भी बदमाश को बंद नहीं गया है। यही नहीं अनहोनी से बचने के लिए लोगों ने थाने में ही हनुमान मंदिर बना दिया।