सोमवार देर रात से मंगलवार तक 24 घंटे में हुई 31 मिलीमीटर बारिश ने फरवरी में बारिश का सात साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। इससे पहले सात फरवरी 2013 को 24 घंटे में 26.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी। इतनी बारिश से शहर के कई इलाकों में सड़कों पर पानी लग गया। इससे मंगलवार की सुबह स्कूल जाने वाले बच्चों और ऑफिस के लिए निकले लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। वहीं तेज हवा और ओले से फसलों को भी नुकसान पहुंचा है।
गोरखपुर में बारिश का सात साल का रिकॉर्ड टूटा, फरवरी में नहीं बरसा था इतना पानी
मौसम विशेषज्ञ कैलाश पांडेय ने बताया कि चक्रवाती हवाओं की वजह से गरज के साथ झमाझम बारिश हुई। गरजने वाले इन बादलों के शिखर (टॉप) और आधार (बेस) में काफी अंतर था। जहां इन बादलों का बेस दो से तीन हजार फीट था, वहीं ऊंचाई 25 हजार फीट के करीब थी। इसकी वजह से बारिश भी काफी असामान्य हुई है। जमीन पर थोड़ी ही दूरी में बारिश की मात्रा में काफी अंतर दर्ज किया गया।
विभिन्न क्षेत्रों में दर्ज की गई बारिश
गोरखपुर (शहर)- 31 मिमी
हरैया - 39.2 मिमी
डुमरियागंज- 24.5 मिमी
फरेंदा- 18 मिमी
सलेमपुर- 16.0 मिमी
खलीलाबाद- 16 मिमी
नौतनवां - 15.0 मिमी
महराजगंज- 13 मिमी
देवरिया- 5.0 मिमी
बांसगांव- 5.0 मिमी
हाटा- 1.0 मिमी
सोमवार देर रात हुई बारिश से कौवाबाग अंडरपास में जलभराव हो गया। हालांकि यह जलभराव काफी मामूली था इस वजह से वाहनों का आवागमन नहीं रोका गया। रेल प्रशासन का कहना है कि यात्रियों को हो रही दिक्कतों के चलते शेड का काम पूरा हुए बगैर अंडरपास को आवागमन के लिए खोल दिया गया। बारिश होने की उम्मीद नहीं थी। शेड को एक महीने के अंदर लगाने का निर्देश दिया गया है। वहीं बारिश से महुईसुघरपुर वार्ड के साकेत नगर, शिवाजी नगर, दुर्गा चौक आदि इलाकों के अलावा दाउदपुर में नगर विधायक के घर के सामने भी पानी भर गया। रीजनल स्टेडियम, जीडीए वीसी आवास के सामने, पुलिस परेड ग्राउंड, रेलवे स्टेडियम आदि जगहों पर भी जलभराव की स्थिति देखने को मिली।
झमाझम बारिश और कुछ इलाकों में ओले पड़ने से मंगलवार को अधिकतम और न्यूनतम तापमान में कमी दर्ज की गई। इससे लोगों को एक बार फिर ठंड महसूस हुई। मंगलवार को अधिकतम तापमान सोमवार की अपेक्षा 4.3 डिग्री सेल्सियस कम 20.7 तो न्यूनतम तापमान एक डिग्री कम 15.4 डिग्री दर्ज किया गया।
सोमवार देर रात हुई बारिश से गेहूं को छोड़कर आलू, मटर, सरसों और अरहर आदि फसलों को नुकसान होगा। कृषि विशेषज्ञ अजय कुमार सिंह ने कहा कि अभी अधिकांश इलाकों में आलू की खुदाई हो रही है। ऐसे में खेतों में पानी भरने से आलू के सड़ने की आशंका है। वहीं इसी मटर, सरसों और अरहर के पौधों में फूल आते हैं। बारिश की वजह से इनके फूल झड़ जाएंगे और फसल प्रभावित होगी। गेहूं की फसल में बालियां लगने का समय है इससे उसे ज्यादा नुकसान नहीं होगा। लेकिन जिन किसानों ने एक दो दिन पहले सिंचाई की होगी उनको थोड़ा सा नुकसान होगा क्योंकि हवा की रफ्तार से गेहूं के पौधे गिर गए होंगे। ऐसे में इन फसलों को अपनी सारी शक्ति पौधों को खड़ी करने में लगानी पड़ेगी और दाने कमजोर होंगे।