लखनऊ प्राणि उद्यान से सात काले हिरण को शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान (गोरखपुर चिड़ियाघर) में लाया गया। इन वन्य जीवों का इंतजार लंबे समय से प्राणि उद्यान में किया जा रहा था लेकिन अति संवेदनशील होने से इन्हें लाने में थोड़ा समय लग गया। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. योगेश प्रताप सिंह की देखरेख में इन्हें बाड़ों में भेजा गया।
यूपी के सबसे खूबसूरत चिड़ियाघर में आए सात काले हिरण, यहां देखें पहली झलक
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लखनऊ प्राणि उद्यान के उप प्रभागीय वन अधिकारी उत्कर्ष शुक्ला ने बताया कि हिरण को लाने के लिए विशेष ट्रक का इंतजाम किया गया था। जिसमें 14 फीट लंबाई और सात फीट की चौड़ाई वाले कमरे का निर्माण किया गया था। हिरणों को चोट न लगे और वे आराम से गोरखपुर तक का सफर पूरा कर सकें इसके लिए चारों ओर गद्दे बिछाए गए थे। खास बात रही कि ट्रक के आगे वाले केबिन में टीवी लगी थी। इसे कंटेनर में लगे सीसीटीवी कैमरे से जोड़ा गया था। बताया कि इस ट्रक को प्राणि उद्यान में पिछले एक सप्ताह से लगाया गया था। अपना घर समझ कर हिरण इसमें आते रहे जिसके बाद उन्हें बंद कर गोरखपुर लाया गया।
गोरखपुर के उप प्रभागीय वन अधिकारी संजय कुमार मल्ल ने बताया कि पूरी टीम काले हिरण के आने पर प्रसन्न है। सेंट्रल जू अथॉरिटी के निर्देशानुसार सभी को क्वारंटीन किया गया है। उनके चिड़ियाघर में उतारे जाते समय निदेशक प्राणि उद्यान राजामोहन, निर्माण निगम परियोजना प्रबंधक डीबी सिंह व अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
काले और सामान्य हिरण में अंतर
उप प्रभागीय वन अधिकारी संजय कुमार मल्ल ने बताया कि काले हिरण को ऐंटीलोप कहा जाता है। यह हिरण की तरह ही होते हैं। सामान्य हिरण की सींग प्रत्येक साल में गिरकर दूसरी आती है। जबकि काले हिरण या ऐंटीलोप की सींग आने के बाद यह गिरती नहीं है। दोनों में यह बड़ा अंतर है।
व्यस्क हिरण को चाहिए प्रतिदिन चार किलो खाना
डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि लखनऊ प्राणि उद्यान की तरह यहां भी इन्हें खानपान दिया जाएगा। एक व्यस्क हिरण के लिए प्रतिदिन चोकर, चना, बरसीन, गाजर, पाकड़, गूलर, बरगद, पीपल की पत्तियां भोज्य सामग्री होती है। इसमें ढाई किलो तक चारा और आधा किलो चना के बाद बाकी पत्तियां और अन्य खाद्य पदार्थ होते हैं।