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कोरोना अलर्ट: बच्चों में डायरिया की दिक्कत हो तो तत्काल कराएं जांच, कोविड की दूसरी लहर के दिख सकते हैं ये लक्षण
Thu, 20 May 2021 12:45 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 20 May 2021 12:45 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
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बच्चों में डायरिया की दिक्कत हो तो इसकी अनदेखी न करें। उनकी डॉक्टर से तत्काल जांच कराएं। कोरोना की दूसरी लहर में बच्चों पर संक्रमण का असर प्रभावी है। इस बीच तीसरे लहर में विशेषज्ञों ने बच्चों पर संक्रमण का असर ज्यादा खतरनाक बताया है। लेकिन दूसरी लहर में बच्चों के संक्रमण के लक्षण बड़ों की तुलना में बेहद अलग हैं। बच्चों में संक्रमण के दौरान डायरिया के मामले सामने आ रहे हैं। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मौजूदा समय में सात बच्चे भर्ती हैं जिनमें चार बच्चों में डायरिया की बात सामने आई है। ऐसे में डॉक्टरों ने सलाह दी है कि अगर बच्चों में इस वक्त डायरिया है तो इसे सामान्य डायरिया न समझें, तत्काल डॉक्टर से संपर्क कर कोरोना की जांच कराएं।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
डायरिया समझ खुद न पिलाएं ओआरएस का घोल
बीआरडी मेडिकल कॉलेज की बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अनीता मेहता ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर में बच्चों में संक्रमण देखने को मिल रहे हैं। संक्रमण के कारण बच्चों में पेट संबंधी तकलीफ ज्यादा देखने को मिल रही है। बच्चे हैं तो ऐसी स्थिति में वह बता नहीं सकते हैं। इसलिए अभिभावक ध्यान रखें अगर बच्चा बार-बार पेट पकड़ रहा है या फिर वह खाना या दूध नहीं पी रहा है और चिड़चिड़ा हो रहा है या डायरिया की समस्या है तो खुद ही ओआरएस का घोल न पिलाएं। तत्काल बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें। क्योंकि इस वक्त का डायरिस कोरोना का लक्षण भी हो सकता है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज की बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अनीता मेहता ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर में बच्चों में संक्रमण देखने को मिल रहे हैं। संक्रमण के कारण बच्चों में पेट संबंधी तकलीफ ज्यादा देखने को मिल रही है। बच्चे हैं तो ऐसी स्थिति में वह बता नहीं सकते हैं। इसलिए अभिभावक ध्यान रखें अगर बच्चा बार-बार पेट पकड़ रहा है या फिर वह खाना या दूध नहीं पी रहा है और चिड़चिड़ा हो रहा है या डायरिया की समस्या है तो खुद ही ओआरएस का घोल न पिलाएं। तत्काल बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें। क्योंकि इस वक्त का डायरिस कोरोना का लक्षण भी हो सकता है।
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- फोटो : अमर उजाला।
तीन दिनों से ज्यादा बुखार हो तो सतर्कता जरूरी
डॉ. अनीता ने बताया कि संक्रमण के दौरान बच्चों में तीन दिनों से ज्यादा बुखार आ सकता है। ऐसी स्थिति में उनके शरीर का तापमान बढ़ सकता है। घर पर ही रहकर बच्चों का बुखार चेक करते रहें। तीन दिनों से ज्यादा बुखार रहता है तो तत्काल चिकित्सक से संपर्क करें।
डॉ. अनीता ने बताया कि संक्रमण के दौरान बच्चों में तीन दिनों से ज्यादा बुखार आ सकता है। ऐसी स्थिति में उनके शरीर का तापमान बढ़ सकता है। घर पर ही रहकर बच्चों का बुखार चेक करते रहें। तीन दिनों से ज्यादा बुखार रहता है तो तत्काल चिकित्सक से संपर्क करें।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
हाईरिस्क बच्चों को खतरा ज्यादा
दूसरी लहर में भी हाई रिस्क बच्चों को संक्रमण का खतरा ज्यादा है। इनमें अस्थमा, ह्दय रोग, मधुमेह, कैंसर, लीवर की समस्या से ग्रसित बीमारी के बच्चे शामिल हैं। ऐसे बच्चों के अभिभावकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। क्योंकि बदल रहे स्ट्रेन की वजह से इन बच्चों को खतरा ज्यादा हो सकता है।
दूसरी लहर में भी हाई रिस्क बच्चों को संक्रमण का खतरा ज्यादा है। इनमें अस्थमा, ह्दय रोग, मधुमेह, कैंसर, लीवर की समस्या से ग्रसित बीमारी के बच्चे शामिल हैं। ऐसे बच्चों के अभिभावकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। क्योंकि बदल रहे स्ट्रेन की वजह से इन बच्चों को खतरा ज्यादा हो सकता है।
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BRD medical college
- फोटो : अमर उजाला
सात बच्चों का चल रहा है बीआरडी में इलाज
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के कोविड वार्ड में सात बच्चों का इलाज चल रहा है। इनमें नौ माह से लेकर 10 साल तक के बच्चे शामिल हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि इन बच्चों में अभी किसी की स्थिति गंभीर नहीं है। इनमें नौ माह की मासूम प्रतिभा और 20 माह का मासूम मो. साजिद शामिल हैं। इन दोनों की स्थिति बेहद गंभीर थी, लेकिन बीआरडी के डॉक्टरों की बदौलत यह दोनों मासूम अब निगेटिव हो चुके हैं। लेकिन अब भी उनकी देखभाल बीआरडी के दूसरे वार्ड में की जा रही है। बताया जा रहा है कि निगेटिव होने के बाद उनके शरीर में कोई अन्य दिक्कतें तो नहीं है, इसी की जांच करने के लिए उन्हें अभी डिस्चार्ज नहीं किया जा रहा है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के कोविड वार्ड में सात बच्चों का इलाज चल रहा है। इनमें नौ माह से लेकर 10 साल तक के बच्चे शामिल हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि इन बच्चों में अभी किसी की स्थिति गंभीर नहीं है। इनमें नौ माह की मासूम प्रतिभा और 20 माह का मासूम मो. साजिद शामिल हैं। इन दोनों की स्थिति बेहद गंभीर थी, लेकिन बीआरडी के डॉक्टरों की बदौलत यह दोनों मासूम अब निगेटिव हो चुके हैं। लेकिन अब भी उनकी देखभाल बीआरडी के दूसरे वार्ड में की जा रही है। बताया जा रहा है कि निगेटिव होने के बाद उनके शरीर में कोई अन्य दिक्कतें तो नहीं है, इसी की जांच करने के लिए उन्हें अभी डिस्चार्ज नहीं किया जा रहा है।