पूर्व मुख्यमंत्री नारायन दत्त तिवारी के कार्यकाल में सात जनवरी 1977 में संतकबीर सहकारी सूती कताई मिल मगहर में स्थापित हुई थी। कताई मिल की नींव पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी के पुत्र स्वर्गीय संजय गांधी ने रखी थी। इस मिल में करीब 1200 मजदूर काम करते थे। वर्ष 1997 में मिल पूरी तरह बंद हो गई और करीब 1200 कामगार बेरोजगार हो गए। बंद मिल फिर चले तो रोजगार के द्वार खुलेंगे।
संजय गांधी ने वर्ष 1977 में रखी थी इस सूती मिल की नींव, अब उपेक्षा का है शिकार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वर्ष 1978 से सूती धागे का उत्पादन शुरू हुआ था। बुनकर बाहुल्य क्षेत्र होने की वजह से बुनकरों को सुलभता से सूत मिल जाया करता था। मिल चालू होने से क्षेत्र के अलावा कस्बे के लोगों के हुनरमंद हाथों को भी काम मिला। मिल मजदूर संगठन के अस्तित्व में आने से वर्ष 1981 में मिल प्रबंधन व मजदूर संगठन के बीच विवाद छिड़ गया। जिसकी वजह से मिल 28 दिन तक बंद हो गई थी, फिर आपसी सहमति से पुनः मिल चली।
वर्ष 1989 में सूती मिल में आग लगने के कारण काफी क्षति हुई और करीब दो वर्ष तक मिल बंद रही। 1992 में पुनः सूती मिल चालू हुई, लेकिन मुनाफे की जगह घाटे के कारण लगातार नहीं चल सकी। 1997 में तत्कालीन जीएम आरपी चौबे के कार्यकाल में मिल पूरी तरह से बंद हो गई। उसके बाद फेडरेशन ने कर्मचारियों को बीआरएस देने की घोषणा कर दी गई।
तत्कालीन एमडी एसडी खन्ना के कार्यकाल में मिल कर्मचारियों को बीआरएस का भुगतान कर दिया गया।मिल पर बकाया अधिक होने के कारण मुंबई हाईकोर्ट के निर्देश पर मिल में ताला लग गया। कर्मचारी जगन्नाथ, शब्बीर अहमद, ताज मोहम्मद, जल्लू, मोहम्मद हनीफ व कमाल खान ने बताया कि मिल बंद होने के बाद से लगातार दोबारा चालू करने की मांग की जा रही है। 28 जून 2018 को प्रधानमंत्री मगहर आए थे तो उम्मीद जगी कि मिल पुनः चालू करने की घोषणा करेंगे लेकिन, आशा निराशा में बदल गई। कताई मिल मजदूर संगठन के अध्यक्ष अशरफ अली ने बताया कि बकाया भुगतान और मिल को दोबारा चालू करने की लड़ाई जारी रहेगी।
नगर चेयरमैन ने भी मिल परिसर में दिया था धरना
नगर चेयरमैन संगीता वर्मा ने भी अपने कार्यकाल से पूर्व में सूती मिल परिसर में मिल को चालू करने व मजदूरों का बकाया भुगतान कराने की मांग को लेकर कई बार धरना दिया था। साथ ही क्षेत्र के जन प्रतिनिधियों से मिलकर मिल को चालू करने की गुहार लगाई थी, ताकि क्षेत्र के लोगों को रोजगार मिल सके।