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Exclusive: अस्सी फीसदी होम आइसोलेट मरीजों तक नहीं पहुंच पा रही आरआरटी, यूनीसेफ कर रहा मॉनिटरिंग
Mon, 03 May 2021 11:38 AM IST
vivek shukla
ऐहतेशाम उद्दीन अहमद, गोरखपुर।
ऐहतेशाम उद्दीन अहमद, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 03 May 2021 11:38 AM IST
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होम आइसोलेशन
- फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के कोरोना पॉजिटिव मरीजों में से मात्र बीस फीसदी तक ही रैपिड रिस्पांस टीम पहुंच पा रही है। इस तरह अस्सी फीसदी मरीजों का पर्यवेक्षण स्वास्थ्य विभाग नहीं कर पा रहा है। शनिवार तक 9602 कोरोना के एक्टिव केस थे। इस आधार पर देखा जाए तो स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन अभी करीब सात हजार मरीजों से संपर्क नहीं कर सका है। यह कयास नहीं है, यूनीसेफ द्वारा प्रतिदिन कोरोना संक्रमित होम आईसोलेट मरीजों से फोन पर बातचीत करके बनाई रिपोर्ट का सच है।
कोरोना वायरस
- फोटो : PTI
दरअसल, जिले में कोरोना पॉजिटिव पाए जाने वाले मरीजों की मॉनिटरिंग सरकारी महकमे के अलावा यूनाइटेड नेशंस चिल्ड्रेंस फंड (यूनीसेफ) भी कर रहा है। संस्था की ओर से रोजाना तैयार की जाने वाली रिपोर्ट के आधार पर यह सामने आया कि कोरोना पॉजिटिव मरीजों में से मात्र बीस फीसदी तक ही रैपिड रिस्पांस टीम पहुंच पा रही है। अस्सी फीसदी मरीजों का पर्यवेक्षण स्वास्थ्य विभाग नहीं कर पा रहा है।
कोरोना
- फोटो : अमर उजाला
यह मरीज होम आइसोलेट हैं या नहीं, इनके परिवार के अन्य सदस्य तो संक्रमित नहीं हुए। इन मरीजों के संपर्क में कितने लोग आए? आरआरटी के नहीं पहुंचने से इन सावधानियों की जानकारी नहीं हो पाती। लगभग इतने ही पॉजिटिव मरीजों तक समय से दवा भी नहीं पहुंच पा रही है। संस्था के अधिकारियों ने अनौपचारिक रूप से बताया कि लगभग अस्सी फीसदी मरीजों तक रैपिड रिस्पांस टीम नहीं पहुंच पा रही है। इसका कारण आरआर टीमों की संख्या पर्याप्त न होना है।
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कोरोना की जांच के लिए सैंपल लेता स्वास्थ्य कर्मी।
- फोटो : अमर उजाला
ऐसे तैयार हो रही है रिपोर्ट
संस्था की ओर से ऐसे मरीजों से दस से अधिक प्रश्न पूछे जाते हैं। इनके जवाब पर रिपोर्ट तैयार कर प्रदेश मुख्यालय पर भेजी जा रही है। यह रिपोर्ट केंद्र और राज्य सरकारों के साथ साझा की जा रही है, ताकि बीमारी से निपटने में जो खामियां पाईं जाएं, उन्हें दूर किया जा सके। देश में टीकाकरण कार्यों का भी निरीक्षण करने वाला यूनीसेफ वर्तमान में कोरोना महामारी से बचाव में प्रशासन व स्वास्थ्य सेवाओं की मॉनिटरिंग भी कर रहा है। संस्था की ओर से इस काम के लिए जिले में दस ब्लॉक मोबिलाइजेशन कोऑर्डिनेटर (बीएमसी) तैनात किए गए हैं। होम आइसोलेट मरीजों की मॉनिटरिंग नाम से चलाए जा रहे इस अभियान में ये बीएमसी प्रतिदिन करीब सौ कोरोना पॉजिटिव मरीजों से संपर्क कर रहे हैं। इन मरीजों से दस से अधिक सवाल कर उनका फीडबैक लिया जा रहा है।
संस्था की ओर से ऐसे मरीजों से दस से अधिक प्रश्न पूछे जाते हैं। इनके जवाब पर रिपोर्ट तैयार कर प्रदेश मुख्यालय पर भेजी जा रही है। यह रिपोर्ट केंद्र और राज्य सरकारों के साथ साझा की जा रही है, ताकि बीमारी से निपटने में जो खामियां पाईं जाएं, उन्हें दूर किया जा सके। देश में टीकाकरण कार्यों का भी निरीक्षण करने वाला यूनीसेफ वर्तमान में कोरोना महामारी से बचाव में प्रशासन व स्वास्थ्य सेवाओं की मॉनिटरिंग भी कर रहा है। संस्था की ओर से इस काम के लिए जिले में दस ब्लॉक मोबिलाइजेशन कोऑर्डिनेटर (बीएमसी) तैनात किए गए हैं। होम आइसोलेट मरीजों की मॉनिटरिंग नाम से चलाए जा रहे इस अभियान में ये बीएमसी प्रतिदिन करीब सौ कोरोना पॉजिटिव मरीजों से संपर्क कर रहे हैं। इन मरीजों से दस से अधिक सवाल कर उनका फीडबैक लिया जा रहा है।
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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : pixabay
इन सवालों के आधार पर तैयार होती है रिपोर्ट
कोरोना पॉजिटिव मिले मरीजों से संपर्क कर दस से अधिक सवाल पूछते हैं। जिनमें नाम और स्वास्थ्य कैसा है, जैसे औपचारिक प्रश्नों के अलावा आंकड़ों के लिए भी आवश्यक प्रश्न होते हैं। पहला प्रश्न यह होता है कि क्या मरीज अलग कमरे में रह रहा है। क्या मरीज के पास पल्स ऑक्सीमीटर है। यदि मरीज हां कहता है तो उससे तुरंत जांच कर रीडिंग बताने को कहा जाता है। इसके बाद पूछा जाता है कि क्या स्वास्थ्य विभाग की आरआरटी उनके घर पहुंची थी। यदि हां तो क्या टीम ने पल्स ऑक्सीमीटर लगाकर उनकी हृदयगति और रक्त ऑक्सीजन स्तर नापा था। यह भी पूछा जाता है कि क्या उसे कोविड के लक्षण मालूम हैं। रक्त ऑक्सीजन की मात्रा यदि 92 से कम है तो क्या किया जाना चाहिए? औसतन दो से तीन फीसदी मरीज रक्त में ऑक्सीजन मात्रा 92 से कम होना बताते हैं तो उन्हें पेट के बल लेट कर सांस लेने की सलाह दी जाती है।
कोरोना पॉजिटिव मिले मरीजों से संपर्क कर दस से अधिक सवाल पूछते हैं। जिनमें नाम और स्वास्थ्य कैसा है, जैसे औपचारिक प्रश्नों के अलावा आंकड़ों के लिए भी आवश्यक प्रश्न होते हैं। पहला प्रश्न यह होता है कि क्या मरीज अलग कमरे में रह रहा है। क्या मरीज के पास पल्स ऑक्सीमीटर है। यदि मरीज हां कहता है तो उससे तुरंत जांच कर रीडिंग बताने को कहा जाता है। इसके बाद पूछा जाता है कि क्या स्वास्थ्य विभाग की आरआरटी उनके घर पहुंची थी। यदि हां तो क्या टीम ने पल्स ऑक्सीमीटर लगाकर उनकी हृदयगति और रक्त ऑक्सीजन स्तर नापा था। यह भी पूछा जाता है कि क्या उसे कोविड के लक्षण मालूम हैं। रक्त ऑक्सीजन की मात्रा यदि 92 से कम है तो क्या किया जाना चाहिए? औसतन दो से तीन फीसदी मरीज रक्त में ऑक्सीजन मात्रा 92 से कम होना बताते हैं तो उन्हें पेट के बल लेट कर सांस लेने की सलाह दी जाती है।