'नाम राम को अंक है, सब साधन रहे हैं सून। अंक गए कछु हाथ नहीं, अंक रहे दस गून।' अर्थात श्रीराम जी का नाम अंक के समान है। बाकी जितने भी साधन हैं, सब शून्य हैं। रामनाम के अंक को शून्य के साथ जोड़ दें तो साधना दस गुणा फलदायी हो जाती है। अपनी अनोखी साधना को कुछ ऐसे ही अंकों के साथ कई गुणा करने में जुटे हैं सदर ब्लॉक के कोड़राग्रांट के बरगदवा टोला निवासी रिटायर शिक्षक रामलखन विश्वकर्मा।
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कागज पर राम का नाम लिखा हुआ है।
- फोटो : अमर उजाला।
अपने नाम में भगवान राम का अंश होने के अनुरूप शहर स्थित सिद्धार्थ शिक्षा निकेतन इंटर कॉलेज में हिंदी प्रवक्ता रहे 70 वर्षीय रामलखन विश्वकर्मा की प्रभु श्रीराम के प्रति आस्था भी अटूट है। छह दिसंबर 1992 में अयोध्या में विवादित ढांचा के बाद से ही भव्य राम मंदिर के निर्माण के संकल्प को लेकर उनके प्रभु श्रीराम के नाम की लेखनी भी शुरू कर दी।
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रामलखन विश्वकर्मा।
- फोटो : अमर उजाला।
शिक्षक पद के दायित्व के साथ-साथ छह दिसंबर 1992 से जुलाई 2011 तक अयोध्या में महंत नृत्य गोपाल दास की अगुवाई में रामनाम खाता से पुस्तिका प्राप्त की। जिसमें दो लाख बार श्रीराम का नाम लिखा। सेवानिवृत्त होने के बाद अयोध्या में पुस्तिका को जमा कर दी।
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- फोटो : अमर उजाला।
इसके बाद से लेखनी और तेज कर दी। सेवानिवृत्त होने के बाद से अब तक साढ़े तीन लाख श्रीराम का नाम लिख चुके हैं। रामलखन कहते हैं कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनने के संकल्प को लेकर रामनाम लिखने की शुरूआत की थी।
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बीते पांच अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में शिलान्यास होने पर काफी खुशी मिली। भविष्य में भव्य राममंदिर देखने का सपना है। लेखन का कार्य अंतिम सांस तक जारी रहेगा।