गोरखपुर के होटल कृष्णा पैलेस में घटना के बाद कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता को अचेतावस्था में पांच पुलिसकर्मी हाथ-पैर पकड़कर बाहर लाए थे, फिर कुछ लोगों के सहयोग से पुलिस की बोलेरो गाड़ी में कारोबारी को डाला था। होटल के बाहर का यह दृश्य सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया है। इसकी फुटेज अमर उजाला के पास सुरक्षित है।
जानकारी के मुताबिक, कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता को 27 सितंबर की रात 12:24 बजे पुलिसकर्मी होटल से बाहर लेकर आते हैं, फिर कुछ लोगों की मदद से मनीष को रामगढ़ताल पुलिस की बोलेरो गाड़ी की बीच वाली सीट पर रखा जाता है। सब कुछ दो मिनट में होता है। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें पूरी कहानी...
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मनीष गुप्ता गोरखपुर मर्डर केस: मनीष गुप्ता हत्याकांड की सीसीटीवी फुटेज।
- फोटो : अमर उजाला।
रात 12:26 बजे पुलिस की गाड़ी होटल के पास से निकल जाती है। सीसीटीवी फुटेज के मुताबिक मनीष को बाहर लाने के साथ ही पुलिस की गाड़ी होटल की बाईं तरफ आकर रुकती है। होटल के गेट से गाड़ी के गेट तक मनीष को ले जाने में करीब एक मिनट का समय लगता है। मनीष को गाड़ी में रखने के बाद पुलिसकर्मी आपस में कुछ बातें करते हैं।
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मनीष गुप्ता गोरखपुर मर्डर केस: मनीष गुप्ता हत्याकांड की सीसीटीवी फुटेज।
- फोटो : अमर उजाला।
पीछे वाली सीट पर दो पुलिस वाले बैठते हैं, जबकि तत्कालीन इंस्पेक्टर जगत नारायण सिंह गाड़ी में आगे वाली सीट पर बैठता है। पुलिस की जीप खड़ी रहती है। इसी बीच एक दरोगा पीछे वाली बाइक को खुद चलाते हुए आगे आता है, उसके पीछे एक अन्य पुलिसकर्मी बैठा होता है। फुटेज में देखकर अंदाजा लगता है कि वह सिपाही था।
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मनीष गुप्ता गोरखपुर मर्डर केस: मनीष गुप्ता हत्याकांड की सीसीटीवी फुटेज।
- फोटो : अमर उजाला।
होटलकर्मी को दरोगा अक्षय मिश्रा ने बुलाया
फुटेज के मुताबिक होटल के बाहर साफ दिखाई दे रहा कि दरोगा अक्षय मिश्रा ने होटल के स्टाफ आदर्श को पास बुलाकर कुछ कहा। इस पर आदर्श तुरंत अपनी बाइक लेकर आता है। इसी बाइक पर बैठकर अक्षय मिश्रा पुलिस की गाड़ी के पीछे निकल जाते हैं।
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मनीष गुप्ता गोरखपुर मर्डर केस: मनीष गुप्ता हत्याकांड की सीसीटीवी फुटेज।
- फोटो : अमर उजाला।
होटल से निजी अस्पताल पहुंचने में दस मिनट लगे
होटल से पुलिस की टीम 12:26 बजे निकल गई थी। इसका मतलब है कि कारोबारी को दस मिनट में लेकर पुलिसकर्मी मानसी अस्पताल पहुंच गए थे। क्योंकि 27 सितंबर की रात 12:36 बजे मानसी अस्पताल पहुंचने का रिकार्ड मिला है। अस्पताल पहुंचते ही मनीष को गंभीर बताकर भर्ती करने से मना कर दिया गया था।