उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में भाजपा विधायकों के खिलाफ सोशल मीडिया पर हमलावर नगर विधायक डॉ. आरएमडी अग्रवाल की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इस मामले को भाजपा ने संगठन व सरकार विरोधी माना है। साथ ही नोटिस देकर सात दिन में जवाब-तलब किया है। आगे की स्लाइड्स में पढ़िए कि किस तरह से डॉ. आरएमडी का राजनीतिक सफर शुरू हुआ था।
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सीएम योगी और नगर विधायक राधा मोहन दास अग्रवाल।(फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला।
बता दें कि वर्ष 2002 में तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ ने शिव प्रताप शुक्ला के मुकाबले डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल को हिंदू महासभा के बैनर तले मैदान में उतार दिया था। उस वक्त डॉ. अग्रवाल को कोई जानता भी नहीं था।
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अपने परिवार के साथ विधायक राधा मोहन दास अग्रवाल।(फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
इसके बावजूद योगी के सघन अभियान का परिणाम यह निकला कि डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल ने कैबिनेट मंत्री शिव प्रताप शुक्ला को 20 हजार से अधिक मतों से हराकर पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी। इसका पूरा श्रेय उन्होंने तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ को दिया था।
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नगर विधायक डॉ. आरएमडी अग्रवाल।
- फोटो : अमर उजाला
बता दें कि नगर विधायक डॉ आरएमडी तमाम मुद्दों पर सोशल मीडिया पर खुली राय रखते हैं। कई बार संगठन व सरकार की लाइन से हटकर पोस्ट लिखते हैं। इसी क्रम में आजकल पीडब्लूडी के सहायक अभियंता केके सिंह के तबादले के मामले को लेकर भी नगर विधायक सोशल मीडिया पर पोस्ट लिख रहे हैं।
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नगर विधायक आरएमडी अग्रवाल। (फाइल फोटो)।
- फोटो : अमर उजाला।
नगर विधायक के पोस्ट का संज्ञान प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने लिया है। प्रदेश अध्यक्ष के निर्देश पर ही प्रदेश महामंत्री जेपीएस राठौर ने डॉ. आरएमडी अग्रवाल को कारण बताओ नोटिस जारी किया। प्रदेश महामंत्री ने कहा कि नगर विधायक के द्वारा सरकार व संगठन की छवि धूमिल करने वाली पोस्ट सोशल मीडिया पर की जा रही है। आपका यह कृत्य अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। इस संदर्भ में विधायक को अपना स्पष्टीकरण देने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है।