पूर्वांचल के जुहू चौपाटी के नाम से जाना जाने वाले रामगढ़ताल की सफाई सिर्फ नौकायन केंद्र और सर्किट हाउस के आसपास सीमित है। वजह, मुख्यमंत्री हों या आलाधिकारी, सभी इसी ओर आते हैं। उनकी नजरों से दूर चिड़ियाघर और देवरिया रोड की तरफ पूरा ताल जलकुंभी से पटा पड़ा है। ठीक यही हाल पैडलेगंज पुलिस चौकी व रेलवे कॉलोनी के पीछे है। मोहद्दीपुर-कूड़ाघाट की तरफ ताल में जलकुंभी ही जलकुंभी दिख रही है। सहारा इस्टेट परिसर के किनारे ताल में गंदगी फैली हुई है।
पूर्वांचल के 'जुहू चौपाटी' की खूबसूरती पर लगा ये दाग, तस्वीरों में देखें इसका हाल
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा रामगढ़ताल में सी-प्लेन उतारने की है। स्पोर्ट्स कांप्लेक्स भी बन रहा है। वाटर स्पोर्ट्स की सारी सुविधाएं मुहैया कराने की कवायद चल रही है। बोटिंग की सुविधा मिली हुई है, लेकिन कई बार जलकुंभी बाधा बनती है। इसी लिहाज से वेटलैंड में शामिल रामगढ़ताल की साफ-सफाई व व्यवस्था की पड़ताल की गई। पता चला कि रामगढ़ताल के कुछ हिस्से को छोड़कर बाकी हिस्से की साफ-सफाई खानापूर्ति तक सीमित है। ताल के ज्यादातर हिस्से पर जलकुंभी का साम्राज्य कायम है।
200 करोड़ की लागत से सुंदरीकरण, फिर भी जलकुंभी का ग्रहण
रामगढ़ताल का करीब 200 करोड़ रुपये की लागत से सुंदरीकरण कराया गया, लेकिन इसकी खूबसूरती पर जलकुंभी का ग्रहण लगा है। 1700 एकड़ क्षेत्र में फैले इस ताल में इन दिनों नौकायन छोड़ चौतरफा जलकुंभी का राज है।
ताल के संरक्षण के लिए हुआ था आंदोलन
गंदगी और अतिक्रमण से सिमटे रामगढ़ताल में वर्ष 2008 में मछलियां मरीं थीं। इसके बाद शहर के लोगों ने ताल के संरक्षण के लिए आंदोलन किया था। लिहाजा, रामगढ़ताल परियोजना की शुरूआत हुई थी। अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करा रहे हैं। इसी वजह से ताल के चारों तरफ बोल्डर पिचिंग का काम कराया गया है।
पब्लिक की बात
- सोनबरसा के सतीश शर्मा ने बताया कि सर्किट हाउस रोड के किनारे ताल में साफ-सफाई अच्छी है। ऐसे ही सभी तरफ होनी चाहिए। सिर्फ एक तरफ की सफाई से भला नहीं होगा।
- बांसगांव के शहाबुद्दीन ने बताया कि चिड़ियाघर में वन्य जीव आ गए हैं। जल्द ही लोकार्पण होगा। चिड़ियाघर के आसपास व देवरिया रोड से सटे ताल में जलकुंभी ही जलकुंभी है। इसका संदेश गलत जा रहा है। पर्यटकों का मोहभंग हो सकता है।