औरंगाबाद में हुए दर्दनाक हादसे के बाद जिला प्रशासन सतर्क हो गया है। अब सड़कों से घर जाने वाले मजदूरों को रोका-टोका नहीं जाएगा ताकि ऐसी परिस्थिति ही न बने कि उन्हें जान जोखिम में डालकर रेल की पटरी आदि खतरनाक रास्तों का विकल्प चुनना पड़े।
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- फोटो : अमर उजाला।
डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने इस संबंध में शनिवार की सुबह ही सड़क, चौराहों और बार्डर के चेक पोस्टों पर ड्यूटी कर रहे प्रशासन एवं पुलिस के अफसरों-कर्मचारियों के निर्देश दिया कि जो भी मजदूर अपनी मर्जी से घर जाना चाहते हैं उन्हें जाने दिया जाए। किसी को बेवजह परेशान न किया जाए।
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उन्होंने कहा कि वहीं जो मजदूर जिले में रहना चाहते हैं, वह रहें। प्रशासन सभी की पूरी देखभाल करेगा। किसी को खाने-पीने की दिक्कत नहीं आने दी जाएगी। जिला मुख्यालय पर नेपाल क्लब और सभी तहसीलों में संचालित कम्यूनिटी किचन से हर मजदूर को दोनों टाइम खाना व नाश्ता दिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर उन्हें राशन भी दिया जाएगा। यही नहीं मजदूरों को अपने परिवार के पालन-पोषण को लेकर भी परेशान होने की जरूरत नहीं है। प्रशासन दूसरे प्रांतों-जिलों से आए मजदूरों को भी रोजगार मुहैया कराएगा।
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दरअसल बड़ी संख्या में हरियाणा, पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र आदि प्रांतों और प्रदेश के भीतर के जिलों से मजदूर घर लौट रहे हैं। हजारों की संख्या में मजदूरों को शासन ट्रेनों-बसों से पहुंचा रहा है। इसके बाद भी बड़ी संख्या में मजदूर साइकिल, रिक्शा, ऑटो या फिर पैदल ही अपने घरों के लिए सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय करने को निकल पड़ रहे हैं।
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संक्रमण का खतरा देख कई जिलों का प्रशासन उन्हें वहीं पर 14 दिन के लिए क्वारंटीन कर दे रहा है। ऐसे में क्वारंटीन से बचने के लिए वे ट्रेन की पटरियों, पुलों के नीचे, पंगडंडियों आदि से चोरी छिपे गुजर रहे जिससे उनकी जान पर खतरा बन आया है। शुक्रवार के औरंगाबाद में ऐसी ही एक घटना में थककर पटरी पर ही सो जाने से कई मजदूरों की जान चली गई।