प्रवासी मजदूरों को सरकारी इंतजाम से उनके घर भेजने की कवायद जिले में धड़ाम ही चल रही है। अब भी बेरोकटोक ट्रक या दूसरे साधनों से मजदूर आ रहे हैं। सहजनवां के कसरवल बॉर्डर पर तो फिर भी सख्ती है, मगर कुशीनगर के बॉर्डर पर कोई पूछने वाला तक नहीं है।
प्रवासी मजदूरों को घर भेजने की कवायद धड़ाम, अब भी चल रहे हैं 'मौत' के सफर पर, तस्वीरें में देखें इनकी बेबसी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डीआईजी, डीएम और एसएसपी सहजनवां बॉर्डर पर पहुंचे और पैदल, ट्रकों से आने वालों को रोककर सरकारी सुविधा दिलाने को कहा।
लॉकडाउन में सर्वाधिक प्रभावित मजदूर वर्ग अपने गांव, घर को लौटना चाहता है ताकि जिंदगी बच सके। मगर इसकी जद्दोजहद में अपनी जान को ही जोखिम में डाल दे रहे हैं। ट्रक या जो भी साधन मिला, उस पर सवार हो जा रहे हैं।
इतना नहीं है कई तो पैदल, साइकिल तक से निकल चुके हैं। अब औरैया में हादसा होने के बाद सरकार ने फिर से फरमान जारी किया है कि किसी भी सूरत में किसी को असुरक्षित यात्रा ना करने दिया जाए और सरकारी व्यवस्था से सबको घर भेजा जाए।
दृश्य एक
बिहार जाने को गोंडा से आठ मजदूर ट्रक पर सवार होकर आ रहे थे। गीडा के बोक्टा के पास ट्रक में सवार एक महिला की मौत के बाद हड़कंप मच गया। इसके बाद सरकारी इंतजाम किया गया। लेकिन इसके पहले किसी ने भी ट्रक को रोकने की जहमत नहीं उठाई थी।
दृश्य दो
शनिवार ढाई बजे तीन साइकिल सवार एक साथ बिहार जा रहे थे। तीनों दिल्ली से चले थे। बाघागाड़ा फोरलेन से उनको जाते हुए नजर तो पुलिस की जरूर पड़ी, मगर किसी ने रोककर कोई सरकारी मदद देने की कोशिश नहीं की।