भारतीय रेल के हर हॉर्न में संकेत छुपा होता है, जिसकी मदद से ड्राइवर स्टेशन मास्टर और गार्ड को संकेत देता है। पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल के लोको पायलट (ड्राइवर) आशुतोष कुमार बताते हैं कि इन संकेतों का बहुत महत्व है। ट्रेनिंग में इसी को सिखाया जाता है। हॉर्न से हम गार्ड को सचेत करते हैं। हालांकि अब वाकी टाकी और मोबाइल जैसी सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं लेकिन आज भी हार्न से संकेत देने के नियम को फॉलो किया जाता है। आगे की स्लाइड्स में पढ़िए हर हॉर्न का मतलब...
ट्रेन में बजाए जाते हैं 13 तरह के हॉर्न, जानिए किस हॉर्न पर मिलता है खतरे का संकेत
एक बार छोटा हॉर्न
अगर ड्राइवर ने एक बार छोटा हॉर्न बजाया तो इसका मतलब है कि ट्रेन यार्ड (जहां ट्रेन की धुलाई होती है) में जाने के लिए तैयार है।
दो बार छोटा हॉर्न
ड्राइवर दो बार छोटा हॉर्न बजा रहा है तो इसका मतलब वो गार्ड से ट्रेन चलाने के लिए सिग्नल (संकेत) मांग रहा है।
तीन बार छोटा हॉर्न
ट्रेन चलाते वक्त अगर ड्राइवर तीन बार छोटा हॉर्न बजा रहा है तो इसका मतलब है गाड़ी अपना नियंत्रण खो चुकी है। गार्ड अपने डिब्बे में लगे वैक्युम ब्रेक लगाए।
चार बार छोटा हॉर्न
ट्रेन चलते हुए अगर रुक जाती है और चालक चार बार छोटा हॉर्न बजा रहा है तो इसका मतलब इंजन में खराबी आने के कारण गाड़ी आगे नहीं जा सकती या फिर आगे कोई दुर्घटना हो गई है, जिसके कारण ट्रेन आगे नहीं जा सकती है।
एक लंबा और एक छोटा हॉर्न
ड्राइवर द्वारा अगर एक लंबा और एक छोटा हॉर्न दिया जा रहा है तो इसका मतलब चालक गार्ड को संकेत दे रहा है कि ट्रेन चलने से पहले ब्रेक पाइप सिस्टम चेक कर लें, ब्रेक ठीक काम कर रहा है या नहीं।
दो लंबा और दो छोटा हॉर्न
चालक द्वारा अगर दो लंबा और दो छोटा हॉर्न दिया जा रहा है तो ड्राइवर गार्ड को इंजन पर बुलाने का संकेत दे रहा है।
लगातार लंबा हॉर्न
अगर चालक लगातार लंबा हॉर्न दे रहा है तो इसका मतलब है ट्रेन नॉनस्टाप (बिना रुके) स्टेशन को पार कर रही है।
रुक-रुक कर लंबा हॉर्न
अगर चालक रुक-रुक कर लंबा हॉर्न दे रहा है तो इसका मतलब ट्रेन किसी रेलवे क्रासिंग (रेलवे फाटक) को पार कर रही है और सड़क मार्ग से आने-जाने वाले लोगों को सतर्क कर रही है।