उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां गरीब परिवार की बेबसी को देखकर एक शख्स के मन को छू गई। करीब 30 साल से ठंड, गर्मी और बारिश की मार को टूटी-फूटी झोपड़ी में एक गरीब परिवार सहन कर रहा था। आगे की स्लाइड्स में देखें फोटोज...
मन को छू गई बेबसी तो खुद की रकम से बनवा दिया गरीब का घर, परिवार बोला- 'फरिश्ता है ये शख्स'
इस परिवार के हालात न तो प्रशासन को नजर आई और न ही जनप्रतिनिधियों को। ऐसे में उसने झोपड़ी की जगह खुद की रकम से गरीब का मकान बनवाने की ठान ली। करीब छह लाख रुपये खर्च हुए और तीन महीने का वक्त लगा। गरीब का आशियाना अब बनकर तैयार हो गया। इस बार दीपावली गरीब परिवार की जिंदगी में रोशनी लेकर आई है।
नाथनगर विकास खंड के चंदापार गांव निवासी दिलीप मिश्र के परिवार में पांच सदस्य हैं। गरीबी की वजह से पन्नी तानकर परिवार के लोग लंबे समय से गुजारा कर रहे थे। ठंड और गर्मी का मौसम तो परिवार के लोग गुजार लेते थे, लेकिन बारिश में पानी की टपकती बूंदें परिवार के लोगों की रात में नींद हराम कर देती थी। पूरी रात बैठकर परिवार को गुजारना पड़ता था।
वैसे तो सरकार की ओर से आवास की योजनाएं संचालित हैं, लेकिन जिम्मेदारों की नजर इस परिवार पर नहीं पड़ी। कोरोना संक्रमण काल में समाजसेवी डॉ. उदय प्रताप चतुर्वेदी जब क्षेत्र में जरूरतमंदों की मदद में निकले तो उन्हें चंदापार के दिलीप मिश्र के परिजनों की समस्या से लोगों ने अवगत कराया। जब गरीब के घर पहुंचे और हालात देखा तो उनके मन में गरीबी के दर्द का अहसास हुआ।
चतुर्वेदी बताते हैं कि दिलीप मिश्र का मकान खुद की रकम से बनवाने की ठान ली। मकान निर्माण में तीन महीने का वक्त लगा और करीब छह लाख रुपये खर्च हुए। दो कमरा, रसोईघर, स्नानघर, बरामदा और शौचालय का निर्माण कराया गया है। 11 नवंबर को पूजा-पाठ के साथ गृहप्रवेश का कार्यक्रम है। उसके बाद गरीब परिवार खुद के मकान में जिंदगी गुजारेगा। इस परिवार की आगे भी हर संभव मदद करेंगे।
दिलीप मिश्र बताते हैं कि लंबे समय से पत्नी और बच्चों का अपने घर का इंतजार था, लेकिन गरीबी की वजह से सपना साकार नहीं हो रहा था। डॉ. उदय प्रताप चतुर्वेदी फरिश्ता बनकर उनके उनके परिवार की ओर ध्यान दिया तो उन्हें भी घर नसीब हो गया। दिवाली पर वह अपने घर में दीए जलाएंगे।