जानिए किस दिन हुआ था भगवान राम और सीता का विवाह, ऐसे मनाया जाता है उत्सव
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विवाह पंचमी का महत्व
पंडित अवधेश मिश्रा के अनुसार, भगवान राम और सीता का विवाह मार्गशीर्ष मास की पंचमी तिथि को हुआ था जिसे हम सभी विवाह पंचमी के रूप में जानते हैं। इस दिन बड़ी संख्या में लोग विवाह के दिन निर्धारित करते हैं लेकिन इस वर्ष विवाह पंचमी 19 दिसंबर को मनाई जाएगी। मार्गशीष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को विवाह पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन संपूर्ण रामचरितमानस का पाठ करने से पारिवारिक सुख की प्राप्ति होती है।
ऐसे करें भगवान राम और सीता का विवाह
पंडित बृजेश पांडेय के अनुसार विवाह पंचमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद राम विवाह का संकल्प लें और श्री राम और सीता जी की मूर्ति या प्रतिमा स्थापित करें। मूर्ति स्थापना के बाद भगवान राम को पीले वस्त्र और माता सीता को लाल वस्त्र अर्पित करें फिर भगवान राम और सीता का गठबंधन करें। इसके बाद विधि विधान से भगवान राम और माता सीता की पूजा अर्चना करें। अंत में आरती के बाद प्रसाद का वितरण करें।
विवाह पंचमी की कथा
पंडित शरद चंद्र मिश्र के मुताबिक पुराणों के अनुसार भगवान राम भगवान विष्णु और माता सीता, माता लक्ष्मी के अवतार थे। राजा दशरथ के घर राम और राजा जनक की पुत्री के रूप में सीता ने धरती पर जन्म लिया। एक बार सीता ने मंदिर में रखे शिव धनुष को उठा लिया था। इस धनुष को धरती पर भगवान परशुराम के अलावा और कोई नहीं उठा सका था। तभी राजा जनक ने यह घोषणा कर डाली कि जो कोई भी भगवान शिव के इस धनुष को उठाएगा उसी से सीता का विवाह होगा।