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जानिए किस दिन हुआ था भगवान राम और सीता का विवाह, ऐसे मनाया जाता है उत्सव

Mon, 14 Dec 2020 06:22 PM IST
vivek shukla अविनाश श्रीवास्तव, गोरखपुर।
अविनाश श्रीवास्तव, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 14 Dec 2020 06:22 PM IST
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Know about Lord Ram and Sita married day
भगवान राम और माता सीता। - फोटो : अमर उजाला।
भगवान राम और सीता का विवाह दुनिया के लिए एक उदारहण है। शादी से पूर्व जब लड़का और लड़की के गुण मिलाए जाते हैं सभी के मन में यही रहता है कि भगवान राम और सीता की तरह ही उनके भी 36 के 36 गुण मिल जाए, लेकिन ऐसे सौभाग्यशाली लोग कम ही होते हैं। साथ ही जिस दिन राम का विवाह हुआ वह दिन भी विवाह के दिन बहुत शुभ माना जाता है। अब हर कोई जानना चाहेगा कि वह कौन सा दिन था जिस दिन भगवान राम और माता सीता का विवाह हुआ?


 
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राम, सीता और लक्ष्मण। - फोटो : अमर उजाला।

विवाह पंचमी का महत्व
पंडित अवधेश मिश्रा के अनुसार, भगवान राम और सीता का विवाह मार्गशीर्ष मास की पंचमी तिथि को हुआ था जिसे हम सभी विवाह पंचमी के रूप में जानते हैं। इस दिन बड़ी संख्या में लोग विवाह के दिन निर्धारित करते हैं लेकिन इस वर्ष विवाह पंचमी 19 दिसंबर को मनाई जाएगी। मार्गशीष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को विवाह पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन संपूर्ण रामचरितमानस का पाठ करने से पारिवारिक सुख की प्राप्ति होती है।

 

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भगवान राम और माता सीता - फोटो : अमर उजाला।

ऐसे करें भगवान राम और सीता का विवाह
पंडित बृजेश पांडेय के अनुसार विवाह पंचमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद राम विवाह का संकल्प लें और श्री राम और सीता जी की मूर्ति या प्रतिमा स्थापित करें। मूर्ति स्थापना के बाद भगवान राम को पीले वस्त्र और माता सीता को लाल वस्त्र अर्पित करें फिर भगवान राम और सीता का गठबंधन करें। इसके बाद विधि विधान से भगवान राम और माता सीता की पूजा अर्चना करें। अंत में आरती के बाद प्रसाद का वितरण करें।

 

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ज्योतिष पं. शरद चंद्र मिश्र। - फोटो : अमर उजाला

विवाह पंचमी की कथा
पंडित शरद चंद्र मिश्र के मुताबिक पुराणों के अनुसार भगवान राम भगवान विष्णु और माता सीता, माता लक्ष्मी के अवतार थे। राजा दशरथ के घर राम और राजा जनक की पुत्री के रूप में सीता ने धरती पर जन्म लिया। एक बार सीता ने मंदिर में रखे शिव धनुष को उठा लिया था। इस धनुष को धरती पर भगवान परशुराम के अलावा और कोई नहीं उठा सका था। तभी राजा जनक ने यह घोषणा कर डाली कि जो कोई भी भगवान शिव के इस धनुष को उठाएगा उसी से सीता का विवाह होगा।

 

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राम-सीता का विवाह। - फोटो : अमर उजाला।
सीता स्वयंवर आयोजन हुआ, जिसमें महर्षि वशिष्ठ के साथ भगवान राम और लक्ष्मण दर्शक के रूप में वहां पहुंचे। उस दिन पंचमी थी। सीता माता के स्वयंवर में कई राजाओं ने प्रयास किया लेकिन कोई भी उस धनुष को हिला नहीं पाया। इस प्रकार राजा जनक ने करुणा भरे शब्दों में कहा- मेरी सीता के लिए कोई योग्य नहीं है तब राजा जनक को देख महर्षि वशिष्ठ ने भगवान राम से इस स्वयंवर में हिस्सा लेने को कहा। गुरु की आज्ञा का पालन करते हुए भगवान श्रीराम ने धनुष को उठाया और उस पर प्रत्यंचा चढ़ाने लगे। प्रत्यंचा चढ़ाते वक्त धनुष टूट गया। इसके बाद सीता ने राम के गले में वरमाला डाली फिर उनका विवाह संपन्न हुआ।
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